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रोज सुबह देसी गुड़ खाने के फायदे - स्वास्थ्य पत्रिका

गुड़ का प्रयोग ग्रामीण इलाकों में गुड़ का उपयोग चीनी के स्थान पर किया जाता है। जानवरो को भी गुड़ खिलाया जाता है l गुड़ लोहतत्व का एक प्रमुख स्रोत है और खून की कमी (एनीमिया) के शिकार व्यक्ति को चीनी के स्थान पर इसके सेवन की सलाह दी जाती है। गुड़ के एक अन्य हिन्दी शब्द जागरी (JAGGERY) का प्रयोग अंग्रेजी में इसके लिए किया जाता है।
खाली पेट गुड़ खाने के फायदे

ईख से प्राप्त ईख का गुड़ एवं ताड़ से प्राप्त ताड़ का गुड़ कहा जाता है, ईख से प्राप्त गुड़ इतना प्रचलित है कि इसे लोग केवल गुड़ ही कहते हैं।

(1). ईख से रस निकालने का तरीका - देशी कोल्हू के द्वारा लगभग 60-65 प्रतिशत रस निकलता है। यह रस बड़े-बड़े कड़ाहों में डाला जाता है। डालते समय कपड़े से रस छान लिया जाता है, तब यह रस उबाला जाता है।

(2). रस की सफाई तथा गुड़ बनाने की विधि - रस को साफ करने के लिये प्राय: चूने का उपयोग किया जाता है। चूना रस में उपस्थित कार्बनिक अम्लों तथा अन्य अपद्रव्यों से मिल कर रासायनिक परिवर्तन करता है। प्रोटीन के अणु भी रस के गरम होने पर एक दूसरे से परस्पर मिलकर अवक्षिप्त हो जाते हैं। ये सब रस के ऊपर आकर लगभग आधा इंच से लेकर एक इंच तक मोटी परत (तेह) बनाते हैं। इनमें रस के अधिकांश अपद्रव्य रहते हैं। इन्हें लोहे के बड़े चम्मचों से अलग कर लेते है। चूने के अतिरिक्त विशेष प्रकार के बने कोयले, घास आदि का भी उपयोग अपद्रव्यों को दूर करने के लिए किया जाता है। अपद्रव्यों को अलग करने के पश्चात् रस को उबालते हैं। इससे रस का जल भाप बनकर उड़ता जाता है। जब रस का चौथाई भाग रह जाता है तब चाशनी (syrup) काफी गाढ़ी हो जाती है और इसमें मणिभ बनने के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। तब चाशनी को खुले बर्तनों में एक डेढ़ इंच मोटे स्तर में डाल देते हैं। जब यह थोड़ा गर्म ही रहता है तब, जब तक अर्ध ठोस न हो जाए, लकड़ी के बड़े चम्मचों से चलाते हैं। फिर या तो बड़े बड़े साँचों में डाल देते हैं या हाथ में लेकर छोटी-छोटी भेलियाँ (पिंडिया) बनाते हैं।

(3). ताड़ी से गुड़ बनाने की विधि लगभग ईख के रस से गुड़ बनाने की भाँति ही है। इसमें अपद्रव्य कम होते हैं। अत: उन्हें छाँटने के लिए चूना इत्यादि देने की आवश्यकता नहीं पड़ती। ईख के गुड़ की अपेक्षा इसमें ग्लूकोज़ की मात्रा अधिक होती हैं एवं चीनी की कम। विटामिन भी इसमें अधिक रहता हैं। अत: स्वास्थ्य की दृष्टि से यह ईख के गुड़ से अधिक लाभकारी है।

गुड़ के गुण पर मिट्टी, खाद आदि का प्रभाव-यदि मिट्टी में विलेय लवणों की मात्रा अधिक रहे तो उसमें पैदा होने वाली ईख का गुड़ प्राय: अच्छा नहीं होता। यह अधिक भूरा एवं जल सोखने वाला होता है तथा वर्षा ऋतु में पसीजता है और हलका काला भूरा सा होता है। उसकी मिठास में भी एक प्रकार का खारापन रहता है। जिस ईख की सिंचाई होती है उसका गुड़ इतना स्वादिष्ट एवं देखने में अच्छा नहीं होता जितना बरानी (बिना सिंचाई के) ईख का होता हैं। किंतु किसी किसी मिट्टी पर सिंचाई का प्रभाव गुड़ के गुणों पर अच्छा भी होता है।

गुड़ में चीनी का बाहुल्य होता है और इसकी मात्रा कभी कभी 90 प्रतिशत से भी अधिक तक पहुँच जाती है। इसमें जल का भी थोड़ा अंश रहता है जो ऋतु के अनुसार घटता बढ़ता रहता है। इसके अतिरिक्त इसमें ग्लूकोज़, फ्रुक्टोज़, खनिज (चूना, पोटाश, फासफ़ोरस आदि) भी अल्प मात्रा में रहते हैं।


गुड़ के घरेलु उपचार, रोग तथा उपचार विधि -

रक्त साफ करना - रकतविकार वाले व्यक्ति को चीनी के स्थान पर गुड़ की चाय, दूध, लस्सी किसी भी पेय में लाभदायक है।

उदर-वायु (Flatulence) - खाने के बाद 25 ग्राम गुड नित्य खाने से उदर-विकार ठीक होते हैं, शरीर में यौवन बना रहता है ।

पुत्रोत्पत्ति - (1) जिनके बार-बार कन्या पैदा होती है, यदि वे पुत्र उत्पन्न करना चाहते है तो एक मौर पंख का चन्द्रमा की शक्ल वालो भाग काट करे पीसकर जरा से गुड़ में गिलाकर एक गोली बना लें। इसी प्रकार तीन पंखों की तीन गोलिया बना लें। गर्भ के दूसरे माह के अन्त में, जब स्त्री का दाहिना स्वर चल रहा हो, अर्थात् दाहिनें नथुने से साँस आ रहा हो.नित्य प्रातः एक गोली तीन दिन तक जीवित बछड़े वाली गाय के दूध के साथ खिला दें । उस दिन केवल गोमाता के -दूध पर ही रहें। खाना न खायें। शाम को चावल खा सकते हैं। शर्तिया पत्र उन्पन्न होगा और चाँद जैसा गोरा। यह सहस्त्र बार परीक्षित है।

शिशु जन्म कैसे लेता है

-स्वामी जगदीश्वरानन्द : घरेलू ओषकिया पुस्तक 'स्वास्थ्य बोधामृत' संकलक धर्मदिवाकर श्री 105 क्षुल्लक सिद्धयागरजी महाराज, श्री जेन आचार्य धर्मसागरवर्ती आश्रम, सीकर (राज० में लिखा है " 

मोरपंख का चन्दोवा लेकर उसके चारों ओर के किनारे के सारे बाल काट दें, केवल चन्दोवा रखें, फिर उसे बारीक पीसकर पुराने गुड़ में मिलाकर गोली बना लें। इस प्रकार तीन चन्दवे की तीन गला बना लें। चाहें तो ऊपर चाँदी को वर्क लगा लें; फिर गर्भ के पौने दो महीने से सवा दो महीने के भीतर रविवार या मंगलवार को बछड़े (नर) वाली काली गाय के दुध के साथ एक गोली नित्य तीन दिन लें। उस दिन केवल दूध ही पीयें और कछ न खायें। इससे पुत्र उत्पन्न होगा'"।

(2) जिन स्त्रियों के कन्यायें ही होती हैं, लड़का नहीं होता, जब तक गर्भ धारण नहीं हो तब तक वे दाँहिनी करवट सो कर रतिक्रिया करें।

(3) जिस स्त्री के कन्या ही कन्या जन्म लेती हों उसे मासिक धर्म में पलास (ढाक) का एक पत्ता दूध में पीसकर पिलादें। ऐसा करने के बाद जो सन्तान होगी, वह पुत्र ही होगा।
-स्वामी जगदीश्वरानन्द।

आधे-सिर में दर्द जो सूर्य के साथ घटे-बढ़े तो 12 ग्राम गुड़ 6 ग्राम घी के साथ प्रातः सूर्योदय से पहले तथा रात को सोते समय खायें

उर-क्षत - शारीरिक परिश्रम करने वाले मजदूर गुड़ खाकर अपने शरीर की टूट-फूट को ठीक कर लेते हैं, थकावट मिटा लेते हैं। अधिक व्यायाम हॉकी आदि खेलने से छाती के अन्दर का माँस फट गया हो, जिसे उर-क्षत कहते हैं, यह दिन में तीन बार गुड़ खाने से ठीक हो जाता है।

हृदय की दुर्बलता, शारीरिक शिथिलता में गुड़ खाने से लाभ मिलता है। 

दमा, सूखी खाँसी - 15 ग्राम गुड़ और 15 ग्राम सरसों का तेल मिलाकर चाटने से लाभ होता है।

पेशाब साफ आना - गर्म दूध में गुड़ मिला कर पीने से पेशाब साफ और खुल कर आता है। रुकावट दूर होती है। यह नित्य दो बार पीयें।

हिचकी - पुराना सूखा गुड़ पीसकर इसमें पिसी हुईं सौंठ मिलाकर सूँघने से हिचकी चलना बन्द हो जाता है।

कृमि - कृमि नाशक ओषधि लेने से पहले रोगी को गुड़ खिलायें। इससे आँतों में चिपके कृमि निकल कर गुड़ खाने लगेगे फिर कृमि नाशक ओषधि के लेने से सरलता से बाहर आ जायेंगे।

काँच, काँटा, पत्थर शरीर में चुभ जाय, बाहर न निकले तो गुड़ और अजवाइन गर्म करके बाँधने से बाहर निकल जाता है l 

रोज गुड़ खाने के फायदे

गुड़ प्राकृतिक मिठाई के साथ ही सेहत का भी खजाना है, जानि‍ए गुड़ खाने के फायदे

पेट के रोग - गुड़ पेट की समस्याओं से निपटने के एक बेहद आसान और फायदेमंद उपाय है। यह पेट में गैस बनना और पाचन क्रिया से जुड़ी समस्त समस्याओं को हल करने में बहुत लाभदायक है। खाना खाने के बाद गुड़ का सेवन पाचन में सहयोग करता है।

पेट में गैस बनने की समस्या होने पर प्रतिदिन एक गिलास पानी या दूध के साथ गुड़ का सेवन करने से पेट में ठंडक होती है, और गैस भी नहीं बनती।

सर्दी होने पर - सर्दी के मौसम में या सर्दी होने पर गुड़ का प्रयोग आपके लिए अमृत के समान होगा। गुड़ की तासीर गर्म होने के कारण यह सर्दी, जुकाम और खास तौर से कफ से आपको राहत देने में मदद करता है इसके लिए दूध या चाय में गुड़ का प्रयोग किया जा सकता है, और आप इसका काढ़ा भी बनाकर पी सकते हैं। 

सर्दी होने पर हमें क्या करना चाहिए

(2). सर्द ऋतु में गुड़ और काले तिल के लड्डू खाने से जुकाम, खाँसी, दमा, ब्रांकाइटिस आदि रोग दूर होते हैं। ये रोग नहीं होने पर भी, तिल-गुड़ के लड्डू खाने से ये रोग नहीं होते। खाँसी, जुकाम होने पर 100 ग्राम गुड़ में एक चम्मच पिसी हुई सौंठ, एक चम्मच कालीमिर्च मिलाकर दिन में चार बार इसके चार हिस्से करके खायें, लाभ होगा।

गुड़ को अदरक के साथ गर्म कर, इसे गुनगुना खाने से गले की खराश और जलन में राहत मिलती है। इससे आवाज भी काफी बेहतर हो जाती है।

जोड़ों में दर्द की समस्या होने पर गुड़ का अदरक के साथ प्रयोग काफी लाभदायक सिद्ध होता है। प्रतिदिन गुड़ के एक टुकड़े के साथ अदरक खाने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।

त्वचा की सेहत के लिए भी गुड़ बहुत फायदेमंद होता है। गुड़ रक्त से हानिकारक टॉक्स‍िन्स को बाहर कर, त्वचा की सफाई में मदद करता है, और रक्त संचार भी बेहतर करता है।

प्रतिदिन थोड़ा सा गुड़ खाने से मुंहासों की समस्या नहीं होती और त्वचा में चमक आती है। यह आपकी त्वचा की समस्याओं को आंतरिक रूप से ठीक करने में मदद करता है।

शरीर में आयरन की कमी होने पर गुड़ आपकी काफी मदद कर सकता है। गुड़ आयरन का एक अच्छा स्रोत है। एनिमिया के रोगियों के लिए भी गुड़ बहुत फायदेमंद होता है।

आप दिन भर के काम काज की वजह से बहुत अधि‍क थकान या कमजोरी महसूस कर रहे हैं, तब भी गुड़ आपकी मदद कर सकता है। क्योंकि यह आपके शरीर में उर्जा के स्तर को बढ़ा देता है, और आपको थकान महसूस नहीं होती।

शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में गुड़ सहायक होता है। इसमें एंटी एलर्जिक तत्व होते हैं, इसलिए अस्थमा होने पर भी मरीज़ों के लिए इसका सेवन काफी फायदेमंद होता है।

अस्थमा के इलाज में गुड़ काफी लाभदायक होता है। गुड़ और काले तिल के लड्डू बनाकर खाने से सर्दी में अस्थमा की समस्या नहीं होती और शरीर में आवश्यक गर्मी बनी रहती है।

इसके अलावा सांस संबंधी रोगों के लिए पांच ग्राम गुड़ को समान मात्रा में सरसों के तेल में मिलाकर खाने से सांस संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिलता है।

प्रतिदिन दोपहर व रात के खाने के बाद थोड़ा सा गुड़ मुंह में रखकर चूसने से पाचन भी बेहतर होता है, और गैस भी नहीं बनती।

गुड़ शरीर में रक्त की सफाई कर मेटाबॉलिज्म रेट को भी नियंत्रित करता है। इसकें अलावा गुड़ गले और फेफड़ों के संक्रमण के इलाज में फायदेमंद होता है।

गला बैठ जाने और आवाज जकड़ जाने की स्थि‍ति में पके हुए चावल में गुड़ मिलाकर खाने से बैठा हुआ गला ठीक होता है एवं आवाज भी खुल जाती है।

कान में दर्द होने पर भी गुड़ काफी लाभदायक होता है। गुड़ को घी के साथ मिलाकर खाने से कान में होने वाले दर्द की समस्या ये निजात मिलती है।

पीलिया हो जाने पर पांच ग्राम सोंठ में दस ग्राम गुड़ मिलाकर एक साथ खाने से काफी लाभ मिलता है।

महिलाओं को मासिकधर्म की समस्याओं में राहत देने के लिए भी गुड़ काफी फायदेमंद है। उन दिनों में गुड़ का सेवन करने से हर तरह की तकलीफ में राहत मिलेगी।

स्मरण शक्ति बढ़ाने में भी गुड़ बहुत फायदेमंद है। इसके नियमित सेवन से याददाश्त बढ़ती है और दिमाग कमजोर नहीं होता।

अगर आपको कम भूख लगती है,तो आपकी इस समस्या का इलाज गुड़ के पास है। गुड़ खाने से आपकी भूख खुलेगी, और पाचनक्रिया दुरूस्त होगी।

गु़ड़ एक अच्छा मूड बूस्ट है, यह आपके मूड को खुशनुमा बनाने में मदद करता है। इसके अलावा माइग्रेन की समस्या में भी गुड़ फायदा पहुंचाता है। प्रतिदिन गुड़ का सेवन करने से लाभ होता है।

खट्टी डकारें आने या पेट की अन्य समस्या में गुड़ में काला नमक मिलाकर चाटने से लाभ होता है। इसके अलावा यह तंत्रिका तंत्र को मजबूत करने में काफी सहायक होता है।

वैसे तो गुड़ को गर्म तासिर का माना जाता है, लेकिन इसके पानी के साथ घोलकर पीने से यह शरीर में ठंडक प्रदान करता है, और गर्मी को नियंत्रित करता है।

अस्थमा के इलाज में गुड़ काफी लाभदायक होता है। गुड़ और काले तिल के लड्डू बनाकर खाने से सर्दी में अस्थमा की समस्या नहीं होती और शरीर में आवश्यक गर्मी बनी रहती है।

इसके अलावा सांस संबंधी रोगों के लिए पांच ग्राम गुड़ को समान मात्रा में सरसों के तेल में मिलाकर खाने से सांस संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिलता है।

गला बैठ जाने और आवाज जकड़ जाने की स्थि‍ति में पके हुए चावल में गुड़ मिलाकर खाने से बैठा हुआ गला ठीक होता है एवं आवाज भी खुल जाती है।

कान में दर्द होने पर भी गुड़ काफी लाभदायक होता है। गुड़ को घी के साथ मिलाकर खाने से कान में होने वाले दर्द की समस्या से छुटकारा मिलता है।

पीलिया हो जाने पर पांच ग्राम सोंठ में दस ग्राम गुड़ मिलाकर एक साथ खाने से काफी लाभ मिलता है। इसके अलावा जुकाम ज्यादा हो जाने पर गुड़ को पिघ्‍ालाकर उसकी पपड़ी बनाकर खाने से लाभ होता है।

महिलाओं को मासिकधर्म की समस्याओं में राहत देने के लिए भी गुड़ काफी फायदेमंद है। उन दिनों में गुड़ का सेवन करने से हर तरह की तकलीफ में राहत मिलेगी।

स्मरण शक्ति बढ़ाने में भी गुड़ बहुत फायदेमंद है। इसके नियमित सेवन से याददाश्त बढ़ती है और दिमाग तेज होता है।

आपको कम भूख लगती है,तो आपकी इस समस्या का इलाज गुड़ के पास है। गुड़ खाने से आपकी भूख खुलेगी, और पाचनक्रिया दुरूस्त होगी।

गु़ड़ एक अच्छा मूड बूस्ट है, यह आपके मूड को खुशनुमा बनाने में मदद करता है। इसके अलाव माइग्रेन की समस्या में भी गुड़ फायदा पहुंचाता है। प्रतिदिन गुड़ का सेवन करने से लाभ होता है।

खट्टी डकारें आने या पेट की अन्य समस्या में गुड़ में काला नमक मिलाकर चाटने से लाभ होता है। इसके अलावा यह तंत्रिका तंत्र को मजबूत करने में काफी सहायक होता है।

वजन कम करने के लिए भी गुड़ का प्रयोग किया जा सकता है। शरीर में जल के अवधारण को कम करके शरीर के वजन को नियंत्रित करता है।

गुड़ को गर्म तासीर का माना जाता है, लेकिन इसके पानी के साथ घोलकर पीने से यह शरीर में ठंडक प्रदान करता है, और गर्मी को नियंत्रित करता है।

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