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फिटकरी के घरेलू उपचार बताइए - स्वास्थ्य पत्रिका

फिटकरी का उपयोग पानी को स्वच्छ करना हो या दाढ़ी बनाने के बाद त्वचा कट जाती है या छील जाती है तो फिटकरी रगड़ने से ठीक हो जाती है l जलन नहीं होती l इससे दाड़ी की त्वचा सुन्दर और स्वस्थ रहेगी।

फिटकरी के घरेलु उपचार

फिटकरी के प्रकार, Types of alum

फिटकरी कई तरह के होते है l पोटैशियम एलम, अमोनियम एलम, क्रोम एलम, एल्‍यूमीनियम सल्‍फेट, सोडियम एलम, सेलेनेट एलम मुख्य है l यह एक रसायनिक पदार्थ है, जो एक क्रिस्टल की तरह होती है. इसका रासायनिक नाम पोटैशियम एल्यूमीनियम सल्फेट है. अंग्रेजी में इसे एलम भी कहा जाता है.

जहाँ चीटियाँ, दीमक हों, फिटकरी सरसों के तेल में मिलाकर डालें। चीटियाँ और दीमक फिर वहाँ नहीं रहेंगी ।

फिटकरी संकोचक (Astringent) अर्थात् सिकुड़न पैदा करने वाली है। त्वचा, नाक, आँख, मुत्राग और मलद्वार पर इसका स्थानीय प्रयोग किया जाता है l रक्तस्राव, दस्त, कुकर खांसी तथा दमा में आन्तरिक सेवन से लाभ होता है।
 

फिटकरी के घरेलू नुस्खे तथा उपचार 

शराब का नशा - यदि शराब ज्यादा पी ली हो तो 6 ग्राम फिटकरी को पानी में घोल कर पिला दें या दो सेव का रस पिलायें। नशा कम हो जायेगा।

जननेन्दिय खुजली (Pruritis) में गर्म पानी में फिटकरी मिलाकर धोने से लाभ होता है l 

टॉन्सिल बढ़ जाने, गले में दर्द होने पर गर्म पानी में फिटकड़ी और नमक डालकर गरारे करें। इससे टॉन्सिल ठीक होते हैं मुँह, गला, दाँत साफ होते हैं।

घावों में रक्तसाव - ताजा घाव हो, चोट, खरोच लगकर घाव हो गया हो, उससे रक्तस्राव हो रहा हो, ऐसे घाव को फिटकरी के पानी से धोयें तथा घाव पर फिटकरी को पीस कर इसका पाउडर छिडकने, लगाने, भुरकने से रक्तस्राव बन्द हो जाता है।

खूनी बवासीर (Bleeding piles) हो, गुदा (Anus) बाहर आती हो तो फिटकरी को पानी में घोलकर कर गुदा में पिचकारी देने से लाभ होता है। एक गिलास पानी में आधा चम्मच पिसी हुई फिटकरी मिलाकर नित्य गुदा को धोयें साफ कपड़ा फिटकरी के पानी में भिगो कर गुदा पर राखें।

गले के रोग - खाने का सोड़ा, खाने का नमक बराबर मात्रा में और जरा सी पीसी फिटकरी मिलाकर एक शीशी में भर कर रख लें । इस मिश्रण की 1 चम्मच, एक गिलास गर्म पानी में घोल लें । इस पानी से सुबह उठते और रात सोते समय अच्छी तरह गरार करने चाहिए l इससे गले की खराबी, टासिल्स की सूजन, मसूड़ों की खराबी और गले में जमा कफ नष्ट होने से गले की व्याधि व खाँसी नहीं होती है l

रक्तस्राव - एक ग्राम फिटकरी पीसकर 25 ग्रास दही और 250 ग्राम पानी मिलाकर लस्सी बनाकर पिलाने से कहीं से भी रक्तस्राव बन्द हो जाता है।

नकसीर - गाय के कच्चे दूध में फिटकरी घोल कर सूँघने से नकसीर ( नाक से रक्त आना) ठीक हो जाती है। यदि नकसीर बन्द न हो तो फिटकरी पानी में घोल कर उसमें कपड़ा भिगोकर ललाट पर रख दें। 5-10 मिनट में रक्त बन्द हो जायेगा। चौथाई चाय की चम्मच फिटकरी पानी में घोल कर नित्य तीन बार पीयें।

मुँह का लिबलिबापन - सैंधा नमक और फिटकरी समान मात्रा में मिलाकर पीये l इसके पाउडर से मंजन करने से दाँतों और मुँह का लिबलिबापन दूर होता है।

आँखें दुखना - एक ग्राम फिटकरी, चालीस ग्राम गुलाब जल में मिलाकर शीशी भरलें, इसकी दो-दो बूँद आँखों में कई बार डालें। आँखों का दर्द, लाली, कीचड़ आना बन्द हो जायेगा। रात सोते समय डालने से आँखों में तरावट रहती है। इसे नित्य डाल सकते हैं।

अँगुलियों की सूजन - पानी में ज्यादा काम करने से जोड़ो में अँगुलियों में सूजन या खाज हो जाये तो पानी में फिटकरी उबालकर उससे धोयें।

पायोरिया, मसूडें में दर्द, सूजन,रक्त आना - एक भाग नमक, दो भाग किटकरी बारीक पीसकर मसूड़ों पर नित्य तीन बार मलें। फिर एक गिलास गर्म पानी में पाँच ग्राम फिटकरी डाल कर हिलाकर कल्ले करें। इससे मसूड़े व दाँत मजबूत होंगे, उनसे रक्त, मवाद आना बन्द हो जायेगा।

 
मसूड़े का दर्द
दाँत दर्द - दाँत में छेद हो, दर्द हो तो फिटकरी रूई में रख कर छेद में दबा दें और लार टपकायें। दाँत दर्द ठीक हो जायेगा।

मलेरिया - एक ग्राम फिटकरी, दो ग्राम चीनी में मिलाकर मलेरिया आने से पहले दो-दो घण्टे से दो बार दें। मलेरिया नहीं आयेगा और आयेगा तो कम। फिर दूसरी बार भी ज़ब मलेरिया आने वाला हो तो इसी प्रकार से दें। रोगी को कब्ज नहीं होनी चाहिए। यदि कब्ज हो तो पहले कब्ज दूर करें।

दस्त और पेचिश - फिटकरी 20 ग्राम और अफीम 3 ग्राम को पीस कर मिला लें। सुबह-शाम इस चूर्ण को दाल के बराबर पानी के साथ रोगी को पिलायें। इससे दस्तों में लाभ होगा। फिर तीन घण्टे के बाद इसबघोल  की भूसी के साथ दें तो पेचिश बन्द हो जायेगी और खून आना भी रुक जायेगा।

हैजा - आधा गिलास पानी में 5 ग्राम फिटकरी घोल कर पिलाने से हैजे में लाभ होता है।

आन्तरिक चोट लगने पर - चार ग्राम फिटकरी को पीस कर आधा किलो गाय के दूध मे मिला कर पिलाने से लाभ होता है।
 
सुजाक - सुजाक में पेशाब करते समय जलन होती है। बडे कष्ट से टपका-टपका पेशाव होता है। इतना कष्ट होता है कि रोगी मरना पसन्द करता है। इसमें 6 ग्राम पिसी हुई फिटकरी एक गिलास पानी में घोल कर पिलायें। कुछ दिन पिलाने से सुजाक ठीक हो जाता है। हाथ-पाँच में पसीना आता हो तो फिटकरी को पानी में घोल कर इससे हाथ-पाँव धोयें।

खाँसी, दमा - आधा ग्राम पिसी हुई फिटकरी शहद में मिलाकर चाटने से दमा, खाँसी में आराम आता है। पिसी हुई फिटकरी एक चाय की चम्मच, आधा कप गुलाब जल में मिलाकर सुबह, शाम दो बार पीने से दमा ठीक हो जाता है।

कूकर खाँसी - चने की दाल के बराबर पिसी हुई फिटकरी गर्म पानी से नित्य लेने से ककर खाँसी ठीक होती है।

गर्भपात - पिसी हुई फिटकरी चौथाई चम्मच एक कप कच्चे दूध में डाल कर लस्सी बनाकर पिलाने से गर्भपात रुक ज्ञाता है। गर्भपात के समय जब दर्द, रक्तस्राव हो रहा हो तो हर दो-दो घंटे से एक खुराक दें।

श्वेत प्रदर व रक्त प्रदर दोनों में चौथाई चम्मच पिसी हुई फिटकरी पानी से नित्य तीन बार फंकी लेने से ठीक हो जाते हैं। फिटकरी पानी में मिला कर मूत्रांग को गहराई तक सुबह, शाम धोयें, पिचकारी दें।

बाँझपन - मासिक धर्म ठीक होने पर भी यदि सन्तान न होती हो तो रुई के फोये में फिटकरी लपेट कर पानी में भिगोकर रात को सोते समय योनि में रखें। सुबह जब निकालेंगे तो उस रूई पर चारों ओर दूध की खुर्चन सी जमी होगी। फोया तब तक रखें, जब तक खूर्चन आती रहे। जब खुर्चन नहीं आये तो समझे बाँझपन रोग समाप्त हो गया।

योनि संकोचन - बाँझपन की तरह फोया रखें तथा फिटकरी पानी में घोल कर योनि दिन में तीन बार धोयें योनि सिकड़ कर सख्त हो जायेगी। ढीलापन ठीक हो जायेगा।

कान में चींटी चली जाय, इससे कान में सुरसुरी हो तो फिटकरी को पानी में घोल कर कान में डालें।

सर्प दंश वाले को फिटकरी पानी में घोल कर पिलायें। बिच्छू काटे स्थान पर फिटकरी पानी में पीस कर लेप करें।

छाले - फिटकरी पानी में घोल कर कल्ले करने से मुँह के छाले ठीक हो जाते हैं।

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