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चावल खाने के फायदे और नुकसान - स्वास्थ्य पत्रिका

चावल खाने के फायदे और नुकसान इन हिन्दी 

चावल का अंग्रेजी नाम (RICE) है तथा वैज्ञानिक नाम - ओराइजा सैटाइवा (Oryza sativa)है l धान के बीज को चावल कहते हैं। यह धान से ऊपर का छिलका हटाने से प्राप्त होता है। चावल सम्पूर्ण जगत में खाया जाने वाला प्रमुख अनाज है। भारत में भात, खिचड़ी , पापड़, पोहा, सहित काफी सारे पकवान बनते हैं। चावल का चलन दक्षिण भारत और पूर्वी-दक्षिणी भारत में उत्तर भारत से अधिक है।

धान से जब केवल उसका बाहरी आवरण (छिलका) हटा दी जाती है तो जो दाना दिखता है उसे भूरा चावल कहते हैं। जिसका रंग भूरा होता है। ब्रान को भी हटा देने से जो चावल मिलता है वह बिल्कुल सफेद रंग का होता है और 'सफेद चावल कहलाता है।
Chawal khane ke fayde or nuksan

सांस्कृतिक हिंदी में पके हुए चावल को 'भात' कहा जाता है, किन्तु अधिकतर हिन्दी भाषी 'भात' शब्द का प्रयोग कम ही करते हैं। चावल की फ़सल को धान कहते हैं। चावल की कई सारी किस्मे होती है l बासमती चावल भारत का प्रसिद्ध चावल है जो विदेशों को निर्यात भी किया जाता है।

भूरा चावल प्रति 100 g चावल में उर्जा 370 किलो कैलोरी होती है साथ ही कार्बोहाइड्रेट 77.24 g, शर्करा 0.85 g, वसा की बात करे तो 2.92 g, होता है l  चावल में प्रोटीन की मात्रा 7.85 g होती है एवं पानी 10.37 g होता है l 

हिन्दू धर्म में चावल का महत्व 

हमारे हिन्दू धर्म में चावल को बहुत महत्व दिया जाता है l देवी देवताओं की पूजा करते समय चावल का भोग लगाया जाता है l किसी कि मृत्यु होती है तब भी चावल ही बनाये जाते है l ये माना जाता है  कि  ग्यारस के दिन चावल नहीं खाना चाहिए ग्यारस के दिन चावल खाने वाले लोग कीड़े खाते है l 

चावल के औषधीय गुण एवं घरेलु प्रयोग 

दस्त - चावल बनाने के पश्चात् इसका उबला हुआ पानी जिसे माँड कहते हैं, फैंक देते हैं। यह दस्तों के लिए लाभदायक है। बच्चों को आधा कप, बड़ों को एक कप प्रति घंटे से पिलाने से दस्त बन्द हो जाते हैं। छोटे शिशुओं को अल्प-मात्रा में पिला सकते हैं। इस माँड में जरा-सा नमक स्वाद के अनुसार मिलाने से माँड स्वादिष्ट, पौष्टिक और सुपाच्य हो जाता है। नमक मिला कर दस्तों में भी पी सकते हैं। माँड को छः घंटे से अधिक पड़ा न रखें। इससे अधिक समय तक रखने से यह बदबू देने लगता है।

माँड बनाने की सरल, सस्ती विधि यह है। कि सौ ग्राम चावल आटे की तरह पीस लें इसे एक लीटर पानी में उबालें। भली प्रकार उबालने के पश्चात् इसे छान कर स्वाद अनुसार नमक मिला लें। इसे ऊपर बताये ढंग से पीयें। दस्तों में भी इसे लाभकारी पायेंगे।

गर्मी नाशक - चावल की प्रकृति शीतल है। पेट में गर्मी भरी होने पर एवं गर्मी के मौसम में नित्य चावल खाने से ठंडक मिलती है। पेट की गर्मी दूर करने हेतु एक भाग चावल, दो भाग मुँग की दाल मिला कर खिचड़ीब नाकर घी डाल कर खायें।

पेचिश, रक्त प्रदर - एक गिलास चावल के धोवन में मिश्री मिलाकर पीने से लाभ होता है।
पेशाब में जलन, रकावट हो तो आधा गिलास चावल के माँड में चीनी मिला कर पिलायें तो जलन और रुकावट दूर हो जायेगी।
Chawal khane ke fayde

चावल आतिसार या पेचिश के रोगियों के लिए उत्तम खाद्य पदार्थ है। सफेद चावलों को पानी मेंi भिगोकर उस पानी से चेहरे को धोने से चेहरे की झाँई मिटकर रंग साफ हो जाता है।

गर्भावस्था की उलटी - 50 ग्राम चावल 250 ग्राम पानी भिगो दें। आधे घण्टे भीगने के बाद 5 ग्राम धनिया भी डाल दें। 10 मिनट बाद मलकर छाल लें। चार बार में इसे चार हिस्से करके पिलायें। गर्भिणी की उल्टिया तत्काल बन्द होगी। भाँग का नशा चावलां की धोवन पीने से उतरता है।

कब्ज़ - एक भाग चावन दो भाग मूँग की दाल की खिचड़ी में घी मिलाकर खाने से कब्ज दूर होती है।

फोड़ा - पिसे हुए चावलों की पुल्टिस सरसों के तेल में बना कर बाँधने से फोड़ा फट जाता है एवं पीव (Pus) निकल जाती है।

कोलेस्ट्रोल - लम्बे समय तक चावल खाते रहने से कोलेस्ट्रोल कम हो जाता है, नहीं है। रक्तचाप भी ठीक रहता है।
बढ़ता

यकृत - सूर्योदय से पहले उठकर मुँह साफ करके एक चुटकी कच्चे चावल मुँह में रखकर पानी से निगल जायें। यह क्रिया यकृत को मजबूत करने के लिये वड़ी अच्छी है। जिन लोगों ने इस प्रकार चाबल लिये हैं। उन्हें लाभ हुआ है।

कच्चा चावल खाने के नुकसान 

हानिकारक - जिन लोगों के गुर्दे और मसाने में पथरी का रोग हो उनके लिए चावल बहुत हानिकारक पदार्थ है। लगातार चावल का सेवन करने से पेट बढ़ता है l जिससे मोटापा बढ़ने लगता है और व्यक्ति मोटापे का शिकार हो जाता है l इसके अलवा चावल खाने से डायबिटीज होने का खतरा बन जाता है l 

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