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दूध पीने का सही तरीका | सही समय | स्वास्थ्य पत्रिका

दूध पीने का सही तरीका, सही समय क्या है और दूध कब और कैसे पीना चाहिए l

गाय का दूध सर्वोत्तम है। दूध को अधिक देर तक गर्म नहीं करना चाहिए। पतले लोगों को मलाईदार दूध और मोटों को मक्खन निकला हुआ दूध पीना चाहिए। आधा किलो दूध अपने विशेष गुणों से एक पाव माँस और तीन अण्डों से अधिक मूल्यवान है। दूध पूर्ण भोजन है। दूध में जीवनोपयोगी सभी पदार्थ हैं।

दूध पीने का सही तरीका/समय

दूध पीने का सही समय (dudh pine ka sahi samaya)

दूध सुबह पीना लाभदायक है। दूध का पाचन सुर्य की गर्मी से होता है। अतः रात को दूध नहीं पीना चाहिए। साधारणतया दूध सोने से तीन घण्टे पहले पीना चाहिए। दूध पीकर तरन्त नहीं सोना चाहिये । रात्रि को ज्यादा गर्म दध पीने से स्वप्नदोष होने की सम्भावना रहती है।

हमें दूध कैसा पीना चाहिए (hame kaisa dudh pina chahiye)

ताजा धारोष्ण दूध पीना अच्छा है। यदि यह सम्भव नहीं हो तो दूध गर्म करके पीयें। गर्म इतना ही करें जितना गर्म पीया जा सके। दूध को अधिक उबालने से जीवन उपयोगी अंश नष्ट हो जाते हैं। दूध को बहुत उलट-पुलट कर झाग पैदा करके धीरे-धोरे पीयें।

टूध में मिठास के लिए क्या मिलाये (dudh me chini milaker pina chahiye ya nahi)

चीनी मिला दूध कफकारक होता है। प्रायः दूध में चीनी मिलाकर मीठा करके पीते हैं। चीनी मिलाने से दूध में जो कैलशियम होता है, वह नष्ट हो जाता है। इसलिए दूध में चीनी नहीं मिलनी चाहिए l दूध में प्राकृतिक मिठास होता है। 

फीके दूध का अभ्यास करने से थोड़े दिन में ही उसके प्राकृतिक मिठास का भान (एहसास) होने लगता है और बाहरी/ऊपरी मिठास की आवश्यकता नहीं होती। जहाँ तक हो इसमें चीनी न मिलायें । 

यदि मिठास की आवश्यकता हो तो शहद, मोठे फलो की रस, मुनक्का को भिगो कर इसका पानी, गन्ने का रस, ग्लूकोज मिलायें। बुरा या मिश्री मिला हुआ दूध वीर्यवर्धक, त्रिदोष नाशक होता है।


दूध पीने के फायदे

दूध का शीघ्र पाचन कैसे करें (dudh pachane ke upay)

किसी-किसी को दूध नहीं पचता, अच्छा नहीं लगता । इसके लिए दूध उबालते समय एक पीपल डालकर दूध उबाल कर पीयें। इससे वायु नहीं बनती। दूध में शहद मिलाकर पीने से गैस नहीं बनती। दूध शीघ्र पचता है l

दूध के साथ नारंगी, मौसमी का रस मिलाकर कर पीने, सुखे मेवे डालकर पीने से या ऊपर से नारंगी खाने से दूध शीघ्र पचता है। दूध पीने के बाद नींबू चूसने से भी शीघ्र पचता है। दूध बादी करता हो, गैस बनाता हो तो । अदरक के टुकड़े या सौंठ का चूर्ण और किशमिश मिलाकर सेवन करें।

दूध कब नहीं पीना चाहिए है? (Dudh kab nahi pina chahiye)

खाँसी, दमा, दस्त, पेचिश, पेटरदर्द, और आदि रोगों में दूध नहीं पीना चाहिए। इनमें ताजा छाछ (मट्ठा) पीना चाहिए। घी भी इनमें नहीं लेना चाहिए।

धारोष्ण दूध (ताज़ा दूध) - दूध निकलवाकर छानकर ताजा, बिना गर्म किए मिश्री या शहद, भिगोई हुई किशमिश का पानी मिलाकर चालीस दिन पीने से वीर्य शुद्ध होता है, नेत्रज्योति, स्मरणशक्ति बढ़ती है। खुजली, स्नायुदौर्बल्य, बच्चों का सूखा रोग, क्षय रोग (टी० बी०) हिस्टीरिया, हृदय की धड़कन आदि में उपयोगी है। छोटे-छोटे दुर्बल बालकों को बहुत ही लाभ करता है। इसे धीरे -धीरे चुसकी लेकर पीयें।

शिशु शक्तिवर्धक - बच्चे बड़े होने पर भी दुर्बल हों,सूखा रोग हो तो उन्हें दूध में बादाम मिलाकर पिलायें।

ऊपर का दूध पीने से दाँत जल्दी खराब (Teeth drinking quickly spoil the teeth)

नई दिल्ली विश्वविद्यालय के दंत-विशेषज्ञ डॉ० जूलियस औजिक के अनुसार शैशवावस्थामें ही बच्चों में दंत-रोगों का बीजारोपण हो जाता है । माँ का स्तनपान करने वाले शिशुओं की अपेक्षा ऊपर का दूध पीने वाले शिशुओं के दाँत आगे चलकर जल्दी खराब हो जाते हैं।

बच्चों को बोतल से दूध पिलाने से नुकसान होता है डॉ० औजिक के अनुसार बोतल से दूध पीने वाले शिशु शक्कर का सेवन करने से मीठे के आदी हो जाते हैं। शैशवावस्था में केवल जीभ ही नहीं अपित होंठ और गले की स्वाद-ग्रंथियाँ भी अधिक संवेदनशील होने के कारण जल्दी प्रभावित हो जाती हैं इसलिए तीन-चार वर्ष के होने तक वे मीठी वस्तुएँ खाना अधिक पसंद करते हैं।

जिससे आगे चल कर दाँत जल्दी खराब हो जाते हैं। डॉ० औजिक का कहना है कि शिशुओं के लिये माँ का दूध ही उत्तम है। यदि उन्हें ऊपर दूध पिलाया जाये तो उसमें चीनी नहीं मिलानी चाहिए। 

डिब्बे के दूध में मिली चीनी भी हानिकारक ही होती है। यदि पहले से ही इस दिशा में सावधानी बरती जाए तो बच्चों के दाँत अधिक मजबूत हो जाएँगे और उनके जल्दी खराब होने का डर भी नहीं रहेगा। दूध में मिलाई जाने वाली चीनी ही दांतों को खराब करती है।

शक्तिवर्धक - आधा किलो दूध में पाव भर गाजर कद्दूकस से छोटे-छोटे टूकड़े करके उबाल कर सेवन करने से दूध जल्दी पचता है, दस्त साफ आता है और दूध में लोहे की मात्रा बढ़ जाती है।

स्त्री संग के बाद एक गिलास दूध में पाँच बादाम पीस कर मिलायें। एक चम्मच देशी घी डालें। फिर उसे पीने से बल मिलता है। नामर्दी दूर करने के लिए सर्दी के दिनों में दो रत्ती केसर डालकर पीयें।

अम्लपित (Acidity) - जिन्हें अम्लपित्त (पेट से कण्ठों तक जलन) हो, उन्हें दिन में तीन बार ठंडा दूध पीना चाहिए।


दूध से बढ़ाये चेहरे की सुंदरता (dudh se badhaye sundarta)


चेहरे का सौन्दर्य - चेहरे पर झाँई, कील, मुँहासे , दाग, धब्बे दूर करने के लिये, सोने के पहले गर्म दूध चेहरे पर मलें, चेहरा घोयें। आधा घण्टे बाद साफ पानी से चेहरा धोयें। इससे चेहरे का सौन्दर्य बढ़ेगा। 

दूध से बढ़ाये चेहरे की सुंदरता

चेहरे के धब्बों पर धारोष्ण दूध (ताज़ा दूध) के झाग मलने से धब्बे मिट जाते हैं। सोते समय चेहरे पर दूध की मलाई लगाने से भी कील, झाँइयाँ मिटती हैं।

होठें का सौन्दर्य (lips Beauty) - एक चम्मच कच्चे दूध में जरा सी केसर पीसकर होठों पर मालिश करने से होठों का कालापन दूर हो जाता है और कान्ति बढ़ती है।

त्वचा का कालापन (Dark Skin) - नित्य चेहरे पर दूध मलें। चेहरा सुन्दर दिखेगा कालापन दूर हो जायेगा। यदि इच्छा हो तो सारे शरीर पर ही दूध मलें, ऐसा करने से रूखापन दूर हो कर, त्वचा मुलायम हो जायेगी और कालापन हट जायेगा।

हिचकी - गर्म दूध पीने से हिचकी बन्द हो जाती है। थकान दूर करने के लिए एक गिलास गर्म दूध पीयें।

खुजली (eczema) - दूध में पानी मिलाकर रूई के फोहे से शरीर पर मलें। थोड़ी देर बाद स्नान कर लें। खुजली मिट जायेगी।

आँखों के रोगों का इलाज (Treatment of eye diseases)

आँखों में चोट लगी हो, जल गई हों, मिर्च मसाला गिरा हो, कोई कीड़ा गिर गया हो या डंक मारा हो, आँखे लाल हो, दुखती हो, कीचड़ आती हो, प्रकाश सहन न हो रहा हो तो रूई का फुआ दूध में भिगोकर आँखों पर रखने से लाभ होता है। रात भर फुआ बंधा रखें तो ज्यादा लाभदायक है। दो बँद दूध की आँख में भी डालें।

आँख में अवाञ्छित वस्तु गिरना - आँख में तिनका या अन्य कोई चीज गिर जाये और निकलती न हो तो आँख में दूध की तीन बूँदें डालें। दूध की चिकनाहट से वे आँख से निकल जायेंगी।

स्वांस नली के रोग, शक्तिवर्धक - दूध में 5 पीपल डालकर गर्म करें। फिर शक्कर डालकर रोज सुबह-शाम पीयें। इससे जुकाम, खाँसी, दमा, फेफड़े की कमजोरी, शुरुआती टी० बी०, वीर्य की कमी एवं कमजोरी दूर होती है। यह प्रयोग आप कुछ महीने कर सकते है।

दूध से बीर्य की पुष्टि - सुबह नाश्ते में एक केला, दस ग्राम देशी घी के साथ खाकर ऊपर से दूध पीयें। दोपहर के बाद दो केले, आधा छटाँक खजूर, एक चम्मच देशी घी खाकर ऊपर से दूध पीयें।

कब्ज रोग - गर्म दूध के साथ इंसबगोल की भूसी या गुलाब का गुलकन्द लेने से मल (टट्टी) खुलकर आती है। बवासीर वालों को भी इसे सेवन करना चाहिये।  गाय का ताजा दूध तलुओं पर मलने, रगड़ते रहने से बवासीर में लाभ होता है।

दस्त रोग - छोटे बच्चों को दस्त हो तो गर्म दूध में चुटकी भर पिसी हुई दालचीनी डाल कर पिलाये। बड़ों को दुगनी मात्रा मिलाकर पिलायें । दस्त me आराम होगा l

माँ का दूध बच्चों के लिए पोषक आहार (Mother's milk nutritious food for children)

माँ का दूध अन्य सभी प्रकार के दूधों से उत्तम होता है। माँ का दूध रोग-निरोधक है एवं शक्ति बढ़ाता है तथा संक्रामक रोगों से बचाव करते हुए शरीर को रखता है।

बच्चे को ऊपर का दूध कैसे पिलाये
शिशु निरोगता (Baby care) - माता का संयमी जीवन ही बच्चे को निरोग रखता है। स्त्री को पुरुष-संग के तत्काल बाद बच्चे को शीघ्र ही दूध नहीं पिलाना चाहिए। इससे बच्चे के शरीर में गर्मी चली जाती है। इसी प्रकार जब क्रोध आया हुआ हो तो बच्चे को दूध न पिलायें। दूध में विटामिन सी नहीं होता। अतः नारंगी-मौसमी का रस बच्चों को अवश्य पिलायें।

अगर बच्चा माँ का दूध न पीता (Baby does not drink mother's milk) हो तो बच्चे को ऊपर का दूध कैसे पिलाना चाहिए (How to breastfeed baby)

यदि बच्चा दूध नहीं पीता है, घृणा करता है तो दूध न पिलायें। दूध के स्थान पर दही, छाछ, लस्सी दूध से बनी अन्य चीजें, खीर, सूजी आदि दें। कुछ सप्ताह बाद बच्चा स्वयं दूध पीने लगेगा l 

बच्चे के भोजन में परिवर्तन करते रहना चाहिये। केले को पीस कर दूध में मिला कर दे सकते हैं।

बच्चों के दाँत गलना - दूध पिलाने के बाद बच्चों को थोड़ा सा पानी पिलायें, दाँत साफ करायें। कोई भी चीज खाने-पीने के बाद थोड़ा सा पानी पिलायें और कल्ले करायें।

दूध से बढ़ाये यौनशक्ति (Increase sexual power with milk)

तीन माह तक लगातार रात्रि को दूध पीने से यौन इच्छा या काम-क्रिया की दृष्टि से स्त्री पुरुषों की यौनेच्छा और काम-शक्ति के के साथ-साथ यौन-क्रिया की अवधि में भारी वृद्धि हो जाती है। 

दूध से बढ़ाये यौनशक्ति

25 से 45 वर्ष की आयु उपरान्त चर्म, यौन एवं रति-रोग, विवाहित स्त्री-पुरुषों पर उक्त विधि का प्रयोग करने विशेषज्ञ डॉ० वीरेन्द्र सिह इस नतीजे पर पहुँचे। 

उन्होंने शारीरिक दृष्टि से पूर्ण रूप से स्वस्थ किन्तु ठंडेपन के शिकार अनेक जोड़ों पर दूध सेवन के उपरान्त यौन-क्रिया के प्रति अति उत्साही पाया और इस नतीजे पर पहुँचे कि रात्रि को दूध पीना न केवन शारीरिक किन्तु यौन-सम्बन्ध के प्रति उत्साह जगाने के लिए भी लाभदायक रहता है। दूध में शहद मिला कर पीने से वीर्य बढ़ता है।



पेशांब की जलन - गर्मी के प्रभाव, गर्म प्रकृति की चीजें खाने से पेशाब में जलन हो तो कच्चे दूध में पानी मिला कर, लस्सी बना कर पीने से लाभ होता है।

नींद ना आना - रात को सोते समय मावा या खोआ खाने से नींद अच्छी आती है।

सिर दर्द, आधे सिर में हो - आधे सर का दर्द जिसे आधासीसी भी कहते है l ये सिर दर्द सूर्य  के साथ घटता-बढ़ता हो तो सूर्योदय के पंहले गर्भ दूध के परिणाम शूल (गेस्ट्रिक और ड्यूडोनल अल्सर) रोगी को दूध पर ही रखें, बार-बार दूध पीकर ही रहे, भोजन न करे। अनार का रस एवं आँवले का मुरब्बा खायें।

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