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लहसुन के फायदे इन हिंदी - स्वास्थ्य पत्रिका

लहसुन का अंग्रेजी नाम garlic है तथा वैज्ञानिक नाम एलियम सैटाइवम (Allium sativum) है l कुछ लहसुनों में एक ही पुती (जवा या तुरी) होती है इसे अंग्रेजी में शैलोट (Shellot) कहते हैं। यह सर्वश्रेष्ठ और सर्वगुणसम्पन्न लहसुन होता है। किसी लहसुन में एक मोटी गाँठ होती है, जिसमें दस, पन्द्रह पुतियाँ होती हैं। यह एक पतिया लहसुन से मध्यम किन्तु फिर भी श्रेष्ठ होता है। लहसुन मिट्टी के सूखे घड़े में रखें तो खराब नहीं होगा। 

Lahsun ke aushdhiya gun
लहसुन के फायदे इन हिंदी
लहसुन के औषधीय गुण - लहसुन खाने से भूख अच्छी लगती है। शरीर में गर्मी, चेहरे पर चमक रहती है, कृमि नष्ट होते हैं। इसे नित्य खाने से रोगों से बचाव होना है तथा रोग होने पर विशेष विधि से खाने से रोग दूर होता है। लहसुन उत्तेजक और चर्मदाहक होता है। लहसुन का प्रभाव सारे शरीर पर होता है l टूटी हड्डियों को जोड़ता है। मेधा शक्ति तथा नेत्रों के लिए हितकर है। यह हृदयरोग, जी्व एवर, शूल, कृष्ज, वायुगोला, अरुचि, खाँसी, सूजन, बवासीर, कुष्ट, अग्निमांय श्वास और 'कफ को नष्ट करता है। यह अधिक पेशाब लाता है, पट के आफरे को दूर करता है। यह सूजन, पक्षाघात, जोड़ों का दर्द, तिल्ली में लाभदायक है। कटिवात, प्यास, दाँतों की सडन को दूर करता है। बार-बार फन्सियाँ होना, पेराटाइफाइड, फ्लू, गुदी के रोगों को लहसुन ठीक करता है। रोग के कीटाण्ओं का नाश करता है। कुछ रोगों में लहसुन के सरल प्रयोग नीचे दिये जाते हैं l 
दमा - होम्योपैथिक डॉ० ई० पी० एन्शूज के अनुसार लहसुन के रस को गर्म पानी के साथ देने से श्वौँसं, दमा में लाभ होता है। लहसुन की एक कली भूनकर दो रक्ती नमक मिलाकर दो बार खाने से श्वाँस में लाभ होता है। एक कप गर्म पानी में दस बूँद लहसुन का रस, दो चम्मच शहद नित्य प्रातः दमा के रोगी को पीना लाभदायक है। इसे दौरे के समय भी पी सकते हैं।

प्लूरिसी - यदि फेफड़े के पर्दे में पानी भर गया हो,ज्वर हो, साँस रुक कर आता हो, छाती में दर्द हो तो लहसुन पीसकर गेहूँ के आटे में मिला कर गर्म-गर्म पुल्टिस बाँधे।

क्षय (टी० बी०) - डॉ० ई० पी० एन्शूज होम्योपैथ ने लिखा है कि लहसुन खाने वालों को क्षय रोग नहीं होता। इसके प्रयोग से क्षय के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। क्षय रोग के लिए लहसुन में सल्फ्यूरिक ऐसिड अच्छी मात्रा में होता है। जो क्षय के कीटाणुओं को नष्ट करता है।

क्षय होने पर 250 ग्राम दूध में कटी हुई दस कली लहसुन की उबाल कर खायं, ऊपर से उस दूध को पीयें। लम्बे समय तक पीते रहने से यक्ष्मा ठीक हो जाता है। फेफड़े के क्षय में लहसुन पसीने को रोकता है। भूख बढ़ाता है और नींद सुखपूर्वक लात्ता है फेफड़ों में क्षय होने पर लहसुन के रस से रूई तर करके सूँघना चाहिए ताकि श्वास के साथ मिलकर इसकी गन्ध फेफड़ों तक पहुँच जाय। इसे बहुत देर तक सूँघते रहना चाहिए। इसकी तीव्र गर्ध ही है जो प्रबल से प्रवल कीटाणुओं, कृमियों तथा असाध्य रोगों को मिटाती है। खाना खाने के बाद लहसुन का सेवन भी करना चाहिए। यक्ष्मा, ग्रंथिक्षय, हड्डी के क्षय में लाभदायक है। प्रयोग से कफ गिरना कम होता है, रात को निकलने वाले लहसुन खोना आंत्र क्षय में लहसुन का रस 5 बूँद 12 ग्राम पानी के साथ पिलाना चाहिए।

जुकाम - जुकाम में लगातार 5-7 या अधिक छींकें आती हों तो लहसुन खाने से छीकें आनी बन्द हो जाती हैं।

गला बैठना  - गर्म जल में लहसुन का रस मिलाकर गरारे करें।

निमोनिया में लहसुन का रस एक चम्मच गर्म पानी में मिलाकर पिलाना गुणकारी है। इससे सीने का दर्द कम होता है।

खांसी - (1) 60 ग्राम सरसों के तेल में लहसुन की एक गाँठ को साफ करके उसमे पकाकर रख लें। इस तेल की सीने  व गले पर मालिश करें। मुनक्का के साथ दिन में तीन बार लहसुन खाये, खटाई खाना छोड़ दें। (2) बीस बूँद  लहसुन का रस अनार के शर्बत में मिलाकर पिलायें । हर प्रकार की खाँसी में लाभ होगा।
Use of lahsun

हरपिंग कफ (काली वाँसी) - (1) पाँच बादाम शाम को पानी में भिगो दें। सुबह छीलकर उनमें मिश्री और एक कली लहसुन की मिलाकर पीस लें और खिलायें। दो-तीन दिन में काली खाँसी ठीक हो जायेगी। बच्चे को लहसुन की माला पहनाना व इसके तेल की मालिश भी लाभदायक है। 

(2) लहसुन का ताजा रस दस बूँद, शहद और पानी चार-चार ग्राम, ऐसी एक-एक मात्रा दिन में चार बार दें।

खुजली- लहसुन को तेल में उबाल कर मालिश करने से खुजली में लाभ होता है। यह रक्त साफ करता है। इसका सेवन भी करना चाहिए।

दाद - दूध पीते हुए बच्चे के दाद हो जाय तो लहसुन को जलाकर इसकी राख शहद में मिलाकर लगाने से लाभ होता है।

दाँतों के रोग - पायोरिया, मसूड़ों की सूजन, दर्द, बदबू हो तो एक चम्मच शहद में बीस बूंद लहसुन का रस मिलाकर चाटें। 60 ग्राम सरसों के तेल में लहसुन को पीस कर डालें और गर्म करें। जब लहसुन जल जाय तो तेल को ठंडा करके छान लें । इस तेल में 30 ग्राम जली हुई अजवाइन डालें और 15 ग्राम पिसा हुआ सैंघा नमक मिलायें । इससे मंजन करें। इससे दाँतों के सामान्य रोग ठीक हो जायेंगे। पायोरिया भी दो-तीन महीने प्रयोग करने से ठीक हो जायेगा।

गंज (Bald) - बाल उड़े हुए स्थान पर लहसुन का रस लगायें और सूखने दें । इस तरह 3 बार नित्य लहसुन का रेस कुछ सप्ताह लगाते रहने से गंज के स्थान पर बाल आ जायेंगे|

जुएँ - लहसुन को पीस कर नींबू के रस में मिलायें। रात को सोते समय इसे सिर पर मलें। सबेरे साबन से सिर धोयें। इस तरह पाँच दिन लगातार नित्य करने से जूँएँ नष्ट हो जाती हैं। ध्यान रहे कि आँखों में न जाये।

मक्खियाँ भगाना - आग पर 5 कली लहसुन तथा चन का दाल के बराबर हींग डाल दें। इनके जलने की गन्ध से मक्खियाँ भाग जायेंगी। 

स्तनों का ढीलापन नियमित चार कली लहसुन खान से दूर होता है स्तन उभर कर तन जाते हैं।

सिरदर्द - चाहे आधे सिर का दर्द हो-कैसा भी दर्द हो, लहसुन पीस कर कनपर्टी पर, जहाँ दर्द हो, लेप करने से दर्द मिट जाता है। लहसुन के लेप से त्वचा पर फफोले पड़ जाते हैं। अतः लेप करते समय सावधान रहना चाहिए। थोड़ी देर लेप करने के बाद घोकर जगह साफ कर देनी चाहिए। यदि आधे सिर का दर्द हो तो जिस ओर दर्द हो उस ओर के नथुने में दो बूँद लहसुन का रस डालें। हर दो घण्टे से दो कलियाँ लहसुन की चबा कर ऊपर से पानी पिलायें।
कान के रोग - चार कली लहसुन को एक चम्मच सरसों के तेल में उबाल कर कान में टपकाने से कान का दर्द, जर्म, पीब बहना ठीक हो जाते हैं।

बहरापन - लहसुन की आठ कलियों को एक छटाँक तिली के तेल में तलकर उसकी दो बँद कान में टपकाने से कुछ दिनों में कान का बहरापन ठीक हो जाता है।

कान बहना  - एक कली लहसुन, एक तोला सिन्दूर को एक छटाँक तिली के तेल में डालकर अग्नि पर पकायें। जब लहसुन जल जाये तो तेल को छानकर शीशी भरलें। इसकी दो बूंद नित्य कान में डालने से मवाद आना, खजलाहट, कर्णनाद आदि रोग नष्ट हो जाते हैं।

रोहिणी (Diphtheria) - एक छटाँक लहसुन की कली चार घण्टे में चूसने से इस रोग में लाभ होता है। बच्चों को इसका रस शर्बत में मिलाकर पिलाना चाहिए। इसकी कलियों का रस बार-बार देते रहना चाहिए।

हिस्टीरिया -  लहसुन का रस नाक में टपकाने से होश आ जाता है।

मिरगी - (1) मिरगी के बेहोश रोगी को लहसुन कूटकर सुँघाने से होश में आ जाता है। दस कली दूध में उबाल कर नित्य खिलाने से मिरगी रोग दूर हो जाता है। यह प्रयोग लम्बे समय तक करें। (2) लहसुन को तेल में सेक कर नित्य खायें।

जलोदर - आधा चम्मच लहसुन का रस 125 ग्राम पानी में मिलाकर पिलाने से जलोदर दूर हो जाता है। यह कुछ दिन पिलाना चाहिए।

पेट-दर्द - चार चम्मच पानी, आधा चम्मच लहसुन का रस स्वादानुसार नमक के साथ पिलाना चाहिए। इससे पेट-दर्द ठीक हो जाता है। हैजे से बचाव : रहने के स्थान पर जगह-जगह छिला हुआ लहसुन रखें। इस से हैजे के कीटाणु मर जायेंगे तथा हैजा नहीं होगा।

कृमि - पाँच कली लहसुन की मुनक्का या शाहद के साथ नित्य तीन बार सेवन करने से पेट के कृमि मर जाते हैं। यह दो-तीन माह सेवन करने से स्वास्थ्य उत्तम हो जाता है।

दर्द - दो गाँठ लहसुन को पीस कर सौ ग्राम तिल के तेल में मिलाकर गर्म करके मलने से दर्द दूर हो जाते हैं।

दस्त में आंव होने पर - एक कली लहसुन के साथ मूँग के बराबर अफीम खाने से आँव बन्द हो जाती है। पाचन-क्रिया को लहसुन से बड़ा बलू मिलता है l यह अंतड़ियो में रुकी हवा को निकाल देता है। इसके लिए चार कली प्रातः रोज खायें l

मूत्र की रुकावट - नाभ से नीचे लहसुन की पुल्टिस बाँधने से मूत्राशय को निर्बलता और मूत्र की रुकावट शीघ्र दूर हो जाती है।

बुखार आने पर - तेज बुखार होने पर लहसुन कुटकर थोड़ा पानी मिलाकर पोटली बनाकर सुघायें। इससे बुखार की तीव्रता दूर हो जाती है। लहसुन का रस 6 ग्राम सुबह, दोपहर तथा शाम, तीन बार पिलाने से बुखार उतर जाती है।

मलेरिया - यदि मलेरिया नित्य निश्चित समय पर आता हो तो लहसुन का रस हाथ-पैरा के नाखूनों पर बुखार आने से पहले लेप करें तथा एक चम्मच लहसुन का रस, एक चम्मच तिल के तेल में मिला कर जब तक बुखार न आये, एक-एक घण्टे से जीभ पर डाल कर चूसे। इस तरह चार दिन लगातार करने से मलेरिया ठीक हो जाता है।

लकवा - (1) एक ओर के अंग में लकवा हो गया हो तो 25 ग्राम छिला हुआ लहसुन पीस कर दूध में उबालें। खीर की तरह गाढ़ा होने पर उतार कर ठंडा होने पर नित्य प्रातः खायें। 250 ग्राम लहसुन को पीस कर 500 ग्राम सरसों का तेल और दो किलो पानी लोहे की कड़ाही में मिला कर गर्म करें। जब सारा पानी जल जाय तो उतार कर ठंडा करें। ठंडा होने पर छान कर नित्य इस तेल की मालिश करें। इस तरह एक माह प्रयोग करने से लकवा ठीक हो जाता है। 
(2) सात कली लहसुन पीस कर एक चम्मच मक्खन में मिला कर खायें। यह भी लकवे में लाभ करता है।

हड्डी - हड्डी टूट गई हो, स्थान से हट गई हो, बढ़ गई हो, हड्डी का कोई भी रोग हो, लहसुन के सेवन से नाभ होता है।

हार्टफेल - जब किसी को हार्ट अटैक (दिल का दौरा) होने लगे तो चार-पाँच कलियों को तरन्त चबा लेना चाहिए। ऐसा करने से हार्ट फेल नहीं होगा। इसके बाद लहसुन दूध में उबाल कर देते रहना चाहिए l हृदय रोग में लहसुन देने से वायु निकल जाती है, हृदय का दबाव हल्का हो जाता है। हृदय को बल मिलता है।
लहसुन का प्रयोग हृदय के लिए

लहसुन में एल्लीसिन (Allicin) नामक पदार्य पाया जात है जो उन कीटाणओं को नष्ट करता है जो पेनीसिलीन से नष्ट नहीं होते। 

अतिरक्त दाब (B.P.) में 6 बूंदे लहसुन का रस चार चम्मच पानी में दो बार नित्य पिलायें।

लहसुन दिल की बीमारी रोकने वाला - नई दिल्ली,2 दिसम्बर, 1976, एक चिकित्सा अनुसंधान से पता चलता है कि कालेस्ट्रोल' को कम करने में लहसुन बड़ा प्रभावशाली है और इस प्रकार लहसुन दिल के दौरे की बीमारी को रोकने में बहुत कारगर है कोलेस्ट्रोल एक ऐसा चरबीदार पदार्थ है जो रक्त नलिकाओं में जम जाता है जिससे पहले एथेरोस्क्लेरोसिस' होता है और अन्त में दिल का दौरा पड़ने लगता है।

डॉ० अरुण बोर्डिया ने अनुसंधान करके यह निष्कर्ष निकाला कि लहसुन हृदय-रोग को रोकता है। परीक्षण करते समय कुछ रोगियों को सौ ग्राम मक्खन खाने को दिया और उसके हानिकारक प्रभावों की जाँच की। मक्खन, घी जैसे चबीदार पदार्थों से रक्त मोटा होना कोलेस्ट्रोल का बढ़ जाना और धमनियों के मोटे हो जाने जैसे प्रभाव होते हैं। इसके पश्चात् उन्हीं रोगियों को इतनी मात्रा में मक्खन के साथ पंचास ग्राम लहसुन भी खाने को दिया गया। परीक्षण के पश्चात् ज्ञात हुआ कि रोगियों में वे हानिकारक प्रभाव नहीं हुए जो केवल घी दिये जाने के कारण होते हैं। छोंक के रूप में लहसुन का छाँक (भगार) देना उपयोगी है ।
 50 सी० सी० लहसुन के रस में एक बूँद मूल तत्त्व मिलता है जिसमें लहसुन के सारे गण निहित होते हैं। लहसुन में गन्धक का एक यौगिक होता है जिसमें मुख्यतःडाईऐलिल डाई सल्फाइड, ऐलिल, प्रोपाइल डाईसल्फाइड और पोली नल्फाइड नाभक तत्त्व होते हैं। यह यौगिक रक्त को पतला बनाए रखता है और धरमनियों में जमे कोलेस्ट्रोल को निकालने का काम करता है। 

हृदय - रोग होने का प्रमुख कारण हृदय की धर्मनियों में जमा होने वाला 'कोलेस्ट्रोल' नामक पदार्थ है, जिनसे धर्मनियाँ सिकुड़ कर रोग ग्रस्त हो जाती हैं। इसका परिणाम यह होता है कि धमनियों में रतक्त का बहाव कम हो जाता है और यह रोग उत्पन्न हो जाता है। घी, चर्बी वाले पदार्थ कोलेस्ट्रोल बढ़ाते हैं। लहसुन धरमनियों को सिकुड़ने से ही नहीं बचाता, वरत् सिकुड़ी हुई रोग ग्रस्त धरमनियों में जमे कोलेस्ट्रोल को निकाल कर पुनः ठीक कर देता है ।

बुढ़ापा - यदि लहसुन का सेवन नियमित किया जाये तो असमय ही बुढ़ापे का शिकार होने से बचा जा सकता है। बुढ़ापे का अर्थ है शरीर की धमनियों का सिकुड़ कर रोग-ग्रस्त हो जाना। यही कारण है कि बुढ़ापे में मनुष्य के शरीर पर झुर्रियाँ पड़ जाती हैं।

स्वप्नदोष - लहसुन की एक कली दाँतों से पीसकर निगल जायें। इससे स्वप्नदोष नहीं होगा। यह प्रयोग रात को सोते समय हाथ-पैर धोकर करें।

नपुंसकता - (1) 62 ग्राम लहसुन को देशी घी में तलकर प्रति दिन खाने से नपंसकता नष्ट होनी है l काम शक्ति बढ़ती है। 

(2) दो सौ ग्राम लहसुन को पीसकर, छः सौ ग्राम शहद में मिलाकर शीशी में भर कर गेहूँ के ढेर या बोरी में एक माह तक दबा दें। एक माह बाद निकालकर 15 ग्राम सुबह व शाम को खाकर गर्म दूध पीयें l यह प्रयोग एक माह करें। बहुत लाभ होगा। इससे बल और  बीर्य बढ़ेगा। 

(3) प्रातः पाँच कली लडसुन की चबाकर दूध पीयें यह प्रयोग पूरी सर्दी नियम से करें। स्त्रियाँ यदि यह प्रयोग करें तो बाँझपन दूर होगा।

वात रोग - लहसुन के तेल की मालिश प्रति दिन करनी चाहिए। लहसुन की एक बड़ी गाँठ को साफ करके, दो-दो टूकड़े करके 250 ग्राम दूध में उबाल लेना चाहिए। इस तरह तैयार की गई लहसुन की खीर 6 सप्ताह पीने से गठिया दूर हो जाता है। यह दूध रात को पीना चाहिए l खटाई, मिठाई का परहेज रखना चाहिए। दूध की खीर, लहसुन को दूध में पीसकर उबाल कर भी ले सकते हैं। मात्रा धीरे धीरे बढ़ाते जाना चाहिए। गठिया में लहसुन खाने से लाभ होता है।

घाव के कीडे - लहसन की दस कली, चौथाई चम्मच नमक दोनों को पीस कर देशी घी में सेंक कर घाव पर जिसमें कीड़े पड़े हों बाँध ले। कीड़े मर जायेंगे तथा घाव भर जायेगा।

चोट, मरोड़ - लहसुन की 10 कलियों को नमक के साथ पीस कर उसकी पूल्टिस बाँधने से चोट और मरोड़ में लाभ होता है। फोड़ा, जख्म लहसुन का प्रयोग बढ़ा देने से जल्दी ठीक होते हैं। फोड़े-फुंसी होने पर प्रारम्भ में ही लहसुन का लेप करना अच्छा है, मवाद पड़ने पर उपयोगी नहीं है। जिन फोडों में कीड़े पड़ जाते हैं उने पर लहसुन लगाने से वे अच्छे हो जाते हैं।

विष का प्रभाव - यदि किसी ने विषैली वस्तु खा ली हो और कोई उपाय न हो, प्राणं संकट में हों तो लहसुन काफी मात्रा में देना चाहिए l लहसुन का रस मल देने से जहरीले कीड़े का विष नष्ट हो जायेगा। लहसुन एवं अमचूर को पीसकर बिच्छु काटे स्थान पर लगा दें, आराम होगा।

पीलिया - चार कली लहसुन की पीसकर आधा कप गर्म दूध में मिला कर पीयें। ऊपर से दूध पीयें। ऐसा प्रयोग चार दिन करने से पीलिया ठीक हो जायेगा। 

जी मिचलाना - यात्रा में खान-पान की गड़बड़ से जी मिचलाने लगे तो लहसुन की कला चबाने से मिचली दूर हो जाती है।

घाव - शरीर में कहीं भी कट कर घाव हो जाये तो लहसुन को दबा कर रस निकाल कर लगाने से घाव जल्दी से ठीक हो जाता है।

शक्तिवर्धक - लहसुन की एक गाठ के तीन हिस्से करके सबह, दोपहर, शाम को कच्चा ही चबाने से शरीर में बल बढ़ता है, पेट की पाँचन शक्ति ठीक रहती हैं। इसकी गन्ध और तेज चरपरेपन से डरना नहीं चाहिए। 

पेट का कैसर - लहसुन के सेवन से पेट का कैंसर नहीं होता है। कैसर होने पर लहसुन को पीसकेर पानी में घोलकर कुछ सप्ताह प्पीने से पेट का कैंसर ठीक हो जाता है। खाना खाने के बाद तीन बार नित्य लहसुन लेने मे पेट साफ रहता है यह पेट की पेशियों में संकोचन पैदा करता है जिससे आंतों को कम काम करना पड़ता है। यह लिवर को उत्तेजित करता है जिससे ऑक्सीजन एवं रक्त पेट की दीवार की सूक्ष्म नालियों (Capillaries) को मिलता है। 
Medicine of cancer

आभाशय - ग्रण (Gastric Ulcer), अतिरिक्त दाब (Hypertension) कृमि, दुर्बल बच्चे, वायु-प्रदूषण के रोग अर्थात् औद्योगीकरण एवं नाना प्रकार के परीक्षणों से बातावरण दृषित होकर स्वास्थ्य गिरता जा रहा है। इन सबको ठीक करने के लिए चार कली कच्चा लहसुन, खाना ख़ाने के बाद सेवन करना चाहिए।

टॉन्सिलाईटिस होने पर आधी गाँठ लहसुन को बारीक  पीसकर गर्म पानी में मिला कर गरारे करने से लाभ होता है।

शीतक्षत (Frostbitc) दाद, सफेद दाग (1.eucoderma). त्वचा का केंसर, दद्रु (Ringworm), खल्याटता (Alopecia) अर्थात् बालों का चकत्ता उड़ना आदि रोगों में लहसुन के आंतरिक सेवन के साथ-साथ बाहर भी लगाना चाहिए।

साँप - जिस घर में लहमुन की गाँठ रखी गहती है, वहाँ साँप नहीं रहता । अगर कहीं माँप के रहने का डर हो तो वहाँ लहसुन रख दो। साँप पास नहीं आयेगा।

सेवन-विधि - लहसुन का सेवन खाना खाने के कुछ समय बाद करें। पहले दो घुँट पानी पीयें जिससे मुँह तर हो जाये, फिर बारीक पिसा हुआ कच्चा लहसुन एक मटर के दाने के बराबर जीभ पर डाल कर ऊपर से एक गिलास पानी पीयें इसे पीने के पाँच मिनट बाद ही पेट में उत्तेजना होने लगती है। यदि उत्तेजना न हो तो समझें कि पेट बहुत खराब है। पीया हुआ पानी शीघ्र ही पेशाब मे निकल जाता है। डॉ० अरुण बोडिया के अनुसार लहसुन का सेवन किया जा सकता है। घी जो कोलेस्ट्रोल बढ़ाता है, घी.की सब्जी में लहसुन का छोंक देने से कोलेस्ट्रोल नहीं बढ़ता।

लगाने की विधि - लहमुन को बारीक पीस कर या रस निकाल कर प्रभावित अगों पर पाँच-दम मिनट लगायें।

सावधानी - लहसुन तीव्र जलन करने वाला और चर्मदाहक है। इसके लेप को अधिक समय रखने से छाला उठ आता है और दर्द होता है। कोमल स्वभाव के लोगों पर इसका लेप सावधानी से करना चाहिए

गन्ध - लहसुन खाने से आने वाली गन्ध को दर करने के लिए लहसन को छील कर रात को पानी या छाछ में भिगो दे इस प्रकार बारह घण्टे भिगोया हुआ लहसुन लेने से गन्ध नहीं आती है। लहसुन खाने के बाद सूखा धनिया चबाने मे इसकी गन्ध नहीं आती है l

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