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स्वप्नदोष क्या होता है? कारण और निवारण - स्वास्थ्य पत्रिका

स्वप्नदोष क्या है - What is swapnadosh?

नींद के दौरान बिना संभोग या हाथों से उत्तेजित किये बिना वीर्य निकल जाने को स्वप्नदोष कहते हैं l मेडिकल टर्मिनोलोजी में इसे Nocturnal emission कहते हैं, जिसका अर्थ भी यही है कि निद्रा के समय अपने आप स्खलन हो जाना।
स्वप्नदोष का कारण और इलाज

स्वप्नदोष क्या होता है - swapnadosh kya hota hai? 

जब व्यक्ति नींद लेता है तो अधिकांश युवकों ने पाया गया कि जब सुबह नींद खुलती है तो लिंग में तनाव प्रायः रोज या हफ्ते में 3-4 बार अवश्य मिलता है इस प्रकार का तनाव प्रत्येक रात में 3-4 बार आता जाता है। यदि तनाव के दौरान नींद में शरीर को कोई उत्तेजना महसूस होती है तो तंत्रिका तंत्र की उत्तेजना से नींद के दौरान ही वीर्य निकल जाता है। सामान्यतया वीर्य निकलना लिंग में तनाव आने पर ही होता है परन्तु कुछ केसों में यह शिश्न की शिथिल अवस्था में भी हो जाता है। यह आवश्यक नही कि स्खलन के दौरान या तुरन्त बाद नींद कई बार सुबह जब नींद खुलती है तो स्वप्नदोष के बारे में खुल जाये मालूम चलता है

किन लोगो को होता है स्वप्नदोष

यह अकेले में सबसे ज्यादा पुरुष होता है, खासकर किशोरावस्था से लेकर विवाह होने तक। यह मान कर चलना होगा कि यदि पुरुष हाथ से वीर्य नहीं निकालता है तो महीने में 3-4 बार स्वप्नदोष होना बिलकुल सामान्य है। विद्यार्थियों, अकेले व्यक्ति खासकर सैनिकों, बार्डर सिक्योरिटी फोर्स, नाविकों, नौसेना के सैनिक, कैदियों या वे व्यक्ति जो लम्बे समय तक घर से दूर रहते हैं, में स्वप्नदोष पाया जा सकता है। यदि पुरुष हस्तमैथुन उसके बावजूद भी उसे स्वप्नदोष हो तो यह स्वप्नदोष की गम्भीरतम अवस्था है।
डॉ किन्स के अध्ययनमें पाया गया कि सबसे ज्यादा आवृत्ति 15 से 23 साल के लोगों में पाई गई। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, वैसें-वैसे स्वप्नदोष की आवृत्ति कम होती जाती है

स्वप्नदोष कम से कम उम्र 13 साल व अधिकतम उम्र 72 साल तक के लोगो में पायी जाती है। वे युवक, जो नियमित रूप से हस्तमैथुन करते थे, उनमें स्वप्नदोष सबसे कम पाया गया। वे युवक जो हस्तमैथुन बहुत कम करते थे उनमें स्वप्नदोष की आवृत्ति व प्रतिशत ज्यादा देखा गया।

स्वप्नदोष क्यों होता है - why does the swapnadosh? 

स्वप्नदोष एक ऐसी समस्या है जो किशोर वर्ग से लेकर प्रत्येक वर्ग के व्यक्तियों को परेशान करती रहती है। प्रारम्भ में इस सामान्य शारीरिक प्रक्रिया को किशोर एवं युवा इसे एक यौन रोग मान कर भयभीत रहते हैं। इसी विचारधारा के चलते वे उपचार के लिये अक्सर नीम-हकीमों के चंगुल में फंस जाते हैं। प्रायः स्वप्नदोष की शुरूआत किशोरावस्था में होती है व लगभग विवाह होने तक चलती रहती है। कभी-कभी दूर रहने पर, तलाक के बाद, विधुरावस्था में भी स्वप्नदोष हो जाता है।

किशोरावस्था में शरीर में वीर्य बनने की प्रक्रिया प्रारम्भ होती है। अब वीर्य निष्कासन के निम्न तरीके हो सकते हैं-

Swapnadosh kya hota hai

1. संभोग द्वारा - किशोरावस्था में शादी की उम्र नहीं होती व हमारे समाज में सामाजिक, धार्मिक, कानूनी रूप से विवाह पूर्व सहवास की अनुमति नहीं है। युवावस्था में विपरित लिंग के प्रति हारमोनों का प्रभाव व वातावरण के प्रभाव से आकर्षण बढ़ता है। विभिन्न प्रकार के उत्तेजक विचारों के फलस्वरूप शरीर में काम केन्द्र (सेक्स सेन्ट्स) उत्तेजित होने लगते हैं । वे वीर्य के स्टोर को भी उत्तेजित करते हैं। जिसके कारण स्वप्नदोष हो जाता है।

2. एकात्मक सेक्स व्यवहार - इसके अन्तर्गत व्यक्ति स्वयं ही अपने हाथों के में इसे हस्तमैथुन अथवा एकात्मक सेक्स व्यवहार कहा जाता है।

3. समलैगिकता - यह यौन आनन्द का एक अप्राकृतिक कृत्य माना जाता है। इसमें पुरुष-पुरुष के साथ यौन सम्बन्ध बनाता है। किशोर और युवावर्ग इसके प्रति इसलिये भी आकृष्ट हो जाता है कि इसमें उसे ऐसे आनन्द की प्राप्ति होती है जिसकी वह कल्पना करता है। वीर्य निष्कासन का भी यह एक माध्यम है।

4. स्वप्नदोष - मानसिक व शारीरिक उत्तेजना के कारण शरीर में सेक्स केन्द्र उत्तेजित होने लगते हैं। शारीरिक क्रियाओं को सुचारू रूप से चलाये रखने के लिये प्रकृति प्रदत्त पांच तरह की संवेदनायें होती हैं- देखना, सुनना, चखना, सूंघना व स्पर्श। इन सबकी कल्पनायें मन मस्तिष्क को उद्देलित करती हैं। रात्रि को सपने में सम्भोग के दौरान ये केन्द्र जब अत्यधिक रूप से उत्तेजित हो जाते हैं तो वीर्य निकल जाता है। महीने में 4-5 बार ऐसा होना स्वाभाविक व प्राकृतिक है।

स्वप्नदोष के कारण

1. कल्पनायें - स्वप्नदोष होने का मुख्य कारण हैं। अश्लील वातावरण, कामुक दृश्यों की कल्पना करना, अश्लील फिल्में देखना, अश्लील साहित्य पढ़ना आदि स्वप्नदोष बढ़ाता है।

2. रात को सोते समय कल्पनाओं के संसार में विचरण करना, उत्तेजक बातें सोचना भी स्वप्नदोष को बढ़ाता है। स्वप्नदोष की आवृति मस्तिष्क के स्नायु तंत्र की उत्तेजना की तीव्रता पर निर्भर होती है।

3. भारी गरिष्ठ भोजन करना, मादक पदार्थों का सेवन, गर्म, चटपटे, मिर्च-मसाले व खटाई का अधिक मात्रा में सेवन करना, अण्डा, मछली, मॉस का ज्यादा सेवन करना भी अधिक स्वप्नदोष का कारण है।

4. सबसे महत्त्वपूर्ण व सबसे ज्यादा प्रभावी कारण, जिस पर अब तक ध्यान कम दिया गया वह है- मूत्र जनन तंत्र का संक्रमण। मूत्र व वीर्य निकलने का एक ही रास्ता होता है। सामान्यतया जब मूत्र निकलता है तो वीर्य का रास्ता बंद हो जाता है व जब वीर्य निकलता है तो मूत्र का रास्ता बंद हो जाता है l मूत्र जनन तंत्र में संक्रमण हो जाने पर स्वप्नदोष बार बार होते है l

5. इस उम्र में वेश्यागमन के बाद के जननांग संक्रमित हो जाते हैं। यह स्नायु तंत्र जो कि वीर्य स्खलन पर नियंत्रण रखता है, को भी प्रभावित करते हैं। इस कारण भी स्वप्नदोष बढ़ जाता है।

6. समलैंगिकता में समलैंगिक एक दूसरे से गुदा मैथुन करते हैं। यदि कण्डोम का उपयोग नहीं किया गया हो तो गुदा क्षेत्र में उपस्थित कीटाणु व जीवाणु जननांगों में मूत्र व वीर्य मार्ग में प्रवेश कर लेते हैं जिससे वीर्य में संक्रमण फैल जाता है व बार-बार स्वप्नदोष होने लगता है।

7. इसी प्रकार सिफलिस, गोनोरिया व हर्पीज वाइरस के संक्रमण व उनके अपूर्ण इलाज के कारण भी स्वप्नदोष की अधिकता हो सकती है। अतः मानसिक अवस्था के अलावा शारीरिक कारण भी स्वप्नदोष की अधिकता के लिये उत्तरदायी होते हैं।

क्या इलाज के बाद स्वप्नदोष बिलकुल बंद हो जायेगा?  

Swapnadosh kya hai in hindi

अधिकांश स्वप्नदोष के रोगी जब इलाज के लिये आते हैं तो उनका पहला प्रश्न यही होता है कि वह इलाज के बाद स्वप्नदोष होना बिलकुल बंद हो जायेगा ? इस पर मेरा जवाब यही रहता है कि नहीं। ऐसा क्यों ? इसको थोड़ा विस्तार से समझते हैं। 15-16 वर्ष के बाद वीर्य निर्माण एक सतत् प्रक्रिया है जो पूरी जिन्दगी कम या ज्यादा होती रहती है । जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है 35-40 साल की उम्र के बाद वीर्य का निर्माण कम होने लगता है लेकिन बंद नहीं होता। स्वप्नदोष की शिकायत किशोरावस्था से विवाह होने तक ज्यादा होती है। पहले बताया जा चुका है कि स्वप्नदोष कोई रोग नहीं है। वरन् सामान्य से अधिक स्वप्नदोष होना ही रोग की श्रेणी में आता है। यदि रोगी का कथन है कि महीने में 4-5 बार स्वप्नदोष होता है व अन्य तरीके से वीर्य नहीं निकल पाता है तो कोई इलाज की आवश्यकता नही होती। अतः रोगियों व पाठकों को यह समझ लेना चाहिये कि सामान्यतया अधिक स्वप्नदोष होने की दशा में इलाज करवाने का उद्देश्य होता है सिर्फ उसे सामान्यता के दायरे में लाना, न कि बंद करना। याद रखिये, स्वप्नदोष एक सामान्य प्राकृतिक क्रिया है जिसे बंद करना असंभव है। यदि शरीर में वीर्य निर्माण होगा तो वह निकलेगा ही।


स्वप्नदोष का शीघ्रस्खलन से क्या सम्बन्ध है ?

यदि किसी युवक को विवाह से पूर्व महीने में 10-15 बार स्वप्नदोष हो तो उसे विवाह से पूर्व योग्य चिकित्सक से जाँच कर इलाज करवा लेना चाहिये क्योंकि ऐसे रोगी विवाह के बाद शीघ्रपतन से ग्रसित होते हैं। जैसा कि पहले वर्णन किया जा चुका है, स्वप्नदोष की अधिकता के अधिकांश केसों में वीर्य, जननांगों व मुत्र मार्ग में संक्रमण पाया गया है। यदि इस समस्या का समाधान विवाह के पर्व नहीं किया गया तो पूरी संभावना है कि व्यक्ति शीघ्रपतन से ग्रसित हो सकता है।

क्या स्वप्नदोष से नपुंसकता आती है?

यदि किसी व्यक्ति को महीने में 15-20 बार लम्बे समय से स्वप्नदोष हो रहा हो तो शादी के बाद द्वितीयक नपुंसकता हो सकती है। अतः व्यक्ति के हित में यही सलाह दी जाती है कि महीने में इतने ज्यादा होने वाले स्वप्नदोष का विवाह से पूर्व योग्य चिकित्सक से इलाज अवश्य कराया जाना चाहिये अन्यथा विवाह के बाद गम्भीर समस्या का सामना करना पड़ेगा।
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स्वप्नदोष से बचाव 

Swapnadosh se kya hota hai

1. स्वप्नदोष के बारे में पहले विचार करें कि आप वास्तव में स्वप्नदोष के रोगी हैं या नहीं है अर्थात् महीने में 4-5 बार स्वप्नदोष होता है। हस्तमैथुन या अन्य तरीके से वीर्य नहीं निकालते हो तो किसी भी तरह की चिन्ता की आवश्यकता नहीं है ।

2. स्वप्नदोष मानसिक विचारधारा, आचार-विचार व व्यवहार से जुड़ा हुआ है, इसके लिये मन की मानसिकता स्वस्थ रखें। अश्लील साहित्य न पढ़ें, कामुक भावनायें न आने दें। विकृत, अश्लील फिल्में न देखें। यदि कुसंगति में पड़ गये हो तो उसका त्याग करें।

3. रात को सोते समय ईश्वर का स्मरण करें। महापुरुषों के विचार मन में रखें, अच्छा साहित्य पढ़ें, टी.वी. पर सिर्फ ज्ञानवर्द्धक कार्यक्रम ही देखें।

4. पेट साफ रखें, कब्ज न रहने दें, पानी खूब पियें, हरी सब्जियों का सेवन करें, अधिक तेज मिर्च-मसाले न खायें, गर्म मसाले, लहसुन, प्याज, आचार, अण्डा, मछली व मॉस का सेवन कम करें। रात को सोते समय गर्म दूध न पियें।

5. यदि मूत्र में जलन हो, बार-बार दो-तीन बार उठना पड़ता हो तो योग्य चिकित्सक से सलाह लें अन्यथा संक्रमण जननांगों में भी हो सकता है जिससे स्वप्नदोष व शीघ्रपतन की समस्या हो सकती है।

6. मधुमेह का पारिवारिक इतिहास हो तो ज्यादा सम्भलकर रहना चाहिये क्योंकि मधुमेह के केसों में मूत्र मार्ग में मधुमेह को नियंत्रण में रखना आवश्यक है ।

7. वेश्यागमन या परस्त्रीगमन भूल कर भी न करें क्योंकि यह रतिजन्य रोगों के फैलाव का प्रमुख कारण है। याद रखिये कि यदि ये रोग एक बार शरीर को लग गये व सही निदान या पूर्ण इलाज नहीं हो सका तो पूरी जिन्दगी स्वप्नदोष/ शीघ्रपतन से ग्रसित होने की संभावना होगी।

8. आज की युवा पीढ़ी में समलैंगिकता का चलन बढ़ता जा रहा है। लेकिन यहाँ यह बताना आवश्यक है कि इसके पक्ष में चाहे कितनी दलीलें दी जायें, समलैंगिकता असामान्य व्यवहार ही माना जावेगा। फिर भी यदि समलैंगिक सम्बन्ध बनाने हों तो कण्डोम का उपयोग करें।)

9. शारीरिक स्वच्छता का पूर्ण ध्यान रखें। प्रतिदिन स्नान से पहले जननांगों व आसपास के क्षेत्र को साबुन व पानी से साफ रखे। नायलोन के या संश्लेषित नें अन्तर्वस्त्र न पहनें। किसी भी प्रकार के संक्रमण होने का अंदेशा होने पर योग्य चिकित्सक से सम्पर्क करें।

10. यह आवश्यक नहीं है कि 4-5 बार स्वप्नदोष की एक सीमा बांध दी गई है यह कोई लक्ष्मण रेखा नहीं है। कहने का तात्पर्य है कि किसी महीने में 2-3 बार स्वप्नदोष हुआ हो तो किसी महीने में 6-7 बार हो तो चिंता की बात नहीं क्योंकि जलवायु. वातावरण, खान पान आदि भी स्वप्नदोषों की आवृत्ति को प्रभावित करते हैं, लेकिन किसी भी समस्या के समाधान के लिये भूलकर भी किसी फार्मेसी, नीम-हकीमों, खानदानी अनाड़ियों, फुटपाथी दवा वालों के पास न जायें । साररूप में स्वप्नदोष कोई बीमारी नहीं है इसकी अधिकता अर्थात् महीने में 4-5 बार से ज्यादा होना ही रोग कहलायेगा, जबकि अन्य तरीकों से वीर्य न निकाला गया हो। फिर भी स्वप्नदोष चाहे महीने में 10 बार हो या तीस बार, इसका पूर्ण सफल व स्थायी इलाज संभव है। कुल मिलाकर सामान्य से अधिक स्वप्नदोष का पूर्ण व सफल इलाज संभव न है लेकिन सामान्य अवस्था में होने वाले व स्वप्नदोष के बारे में किसी प्रकार की ने चिन्ता करने की आवश्यकता नहीं है। इस न बारे में भ्रामक बातों से दूर रहें ।
डॉ अरुण गुप्ता, सुखसागर हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेंटर, जयपुर


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