Search amazon Product

Ad banner

अंगूर खाने के 17 बेमिसाल फायदे - स्वास्थ्य पत्रिका

अंगूर एक फल है, अंगूर की खेती होती है ये बेल में में लगते है अंगूर का फल झूम के रूप में लगता है एक झूम में 50-500 अंगूर तक लगते है l ये दो कलर के होते है काला/बैंगनी तथा हरा ये बहुत खट्टे तथा मीठे होते है l अंगूर में लोहा तत्व सबसे अधिक पाया जाता है l मीठे अंगूर ही खाना चाहिए l अंगूर सुख जाने पर किशमिश बन जाता है l जैसे (अदरक सुख जाने पर सौंठ बन जाती है ठीक इसी प्रकार) अंगूर की शराब भी बनाई जाती है अंगूर का सेवन कई प्रकार के रोगों में लाभकारी है 

अंगूर में कोनसा विटामिन पाया जाता है, angur mein konsa vitamin paya jata h 

प्रति 100 ग्राम अंगूर में उर्जा 70 किलो कैलोरी  होती है l कार्बोहाइड्रेट 18.1 g, शर्करा 15.48 g, प्रोटीन0.72 g, विटामिन B6, विटामिन B12 , विटामिन C, विटामिन K  पायी जाती है l पोषक तत्वों की बात करे तो कैल्शियम, लोहतत्व, मैगनीशियम, मैगनीज़, फॉस्फोरस, पोटेशियम, सोडियम तथा जस्ता पाया जाता है l 
अंगूर खाने के फायदे बताइये

अंगूर खाने से क्या फायदा होता है, angur khane se kya fayda hota hai 

अंगूर स्वस्थ मनुष्यों के लिए पौष्टिक भोजन है l अंगूर के औषधीय गुण तथा फायदे के बारे में बताता हूँ अंगूर सिर्फ स्वस्थ व्यक्ति के लिए ही नहीं रोगी को भी शक्ति प्रदान करता है l भोजन के रूप में अंगूर कैन्सर, क्षय (T.B), पायोरिया, बच्चों का सूखा रोग, सन्धिवात, फिट्स, आमाशय में घाव, बार-बार मूत्र जाना, दुर्बलता, खून पतला करना(रक्त विकार) खून साफ करना, आदि में अंगूर सेवन किया जाता है।

अंगूर अकेला खाने पर लाभ करता है। किसी अन्य वस्तु के साथ मिलाकर इसे नहीं खाना चाहिए। अंगूर सूख जाने पर किशमिश बन जाता है। जब अंगूर नहीं मिलता हो तो अंगूर की जगह किशमिश काम में ले सकते हैं।

जिन बड़े-बड़े भयंकर एवं जटिल रोगों में किसी प्रकार का कोई पदार्थ खाने-पीने को नहीं दिया जाता है उनमें अंगूर या दाख (किशमिश) दी जाती है। अंगूर को औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है l

17 amazing benefits of eating grapes for health 

अंगूर को बीमारियों में उपयोग करने की विधि इस प्रकार है :-

जुकाम - रोज कम से कम 50 ग्राम अंगूर खाते रहने से बार-बार जुकाम लगना बन्द हो जाता है।

गठिया - अंगूर शरीर से उन लवणों को निकाल देता है जिनके कारण गठिया शरीर में बानी रहती है। गठिया की परिस्थितियों को साफ करने के लिए प्रातः अंगूर खाते रहना चाहिए।

अंगूर खाने से कैंसर का इलाज, angur khane se cancer thik hota hai 

कैन्सर - कैन्सर में पहले तीन दिन रोगी को उपवास करायें। फिर अंगर सेवन कराना आरम्भ करें। कभी-कभी एनिमा लगायें। एक दिन में दो किलो से अधिक अंगूर न खिलायें।

कछ दिन पश्चात् छाछ पीने को दी जा सकती है। अन्य कोई चीज खाने को न दें। इससे लाभ धीरे-धीरे, महीनों में होता है। इस रोग की चिकित्सा में कभी-कभी अंगुर का रस लेने से पेट-दर्द, मलद्वार पर जलन होती है। इससे डरना नहीं चाहिए। दर्द कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। दर्द होने पर सेक कर सकते हैं।

कैन्सर के रोगी को निम्न परहेज करे :-
1. रोगी को छह माह तक चूल्हे पर पकाई हुई खुराक नहीं दें।
2. प्रथम दो महीने कैन्सर के रोगी का आहार केवल अंगूरे ही रखें।
3. इसके बाद अंगूर के साथ अन्य हल्का का आहार किया जा सकता है। यह एक माह करें।
4. इसके बाद वाले एक महीने में अंगूर व फलाहार के साथ अपक्व (कच्चा) भोजन किया जा सकता है। फलों में टमाटर, संतरा, मोसम्मी; काजू, बादाम ले सकते हैं।
5. इसके बाह एक महीने तक कुछ पक्वाहार (पका हुआ भोजन) दिया जा सकता है।
6. अंगूर कल्प की सम्पूर्ण अवधि में पूरा आराम करना चाहिए।

चेचक - अंगूर गर्म पानी से धोकर खाने से चेचक में लाभदायक होता है।

मिरगी - मिरगी के रोगियों के लिए अंगूर खाना बहुत लाभदायक होता है। अतः उन्हें अंगूर खाना चाहिए।

आधे सिर का दर्दअंगूर का रस एक कप रोज सुबह सूर्य निकलने (सूर्योदय) से पहले पीने से आधे सिर का दर्द (आधा-सीसी का दर्द, दर्द जो सूर्य के साथ बढ़ता है) ठीक हो जाता है।

खाँसी-कफ - अंगूर खाने से फेफड़ों को शक्ति मिलती है। जुकाम खाँसी दूर होती है। कफ बाहर आ जाता है। अंगूर खाने के बाद पानी न पीयें।

दमा - दमें में अंगूर खाना बहुत लाभदायक है। यदि थूकने में रक्त आता हो तब भी अंगूर खाने से लाभ होता है।

हृदय में दर्द एवं धड़कन - रोगी यदि अंगूर खा कर रहे तो हृदय-रोग शीघ्र ठीक हो जाते हैं। जब हृदय में दर्द हो और धड़कन अधिक हो तो अंगूर का रस पीने से दर्द बन्द हो जाता है तथा धड़कन सामान्य हो जाती है। थोडी देर में ही रोगी को आराम आ जाता है तथा रोग की आपातकालीन (Emergency) दूर हो जाती है। अंगूर खाने से घबराहट दूर हो जाती है और उलटी भी बंद हो जाती है l 

दाँत निकलना - (दाँत आना) दाँत निकलने के समय अंगूरों का दो चम्मच रस नित्य पिलाते रहने से दाँत सरलता और शीघ्रता से निकल आते हैं, बच्चा रोता नहीं है। वह हँस-मुख रहता है। बच्चा सुडौल रहता है। सूखे का रोग नहीं होता है l बच्चा फिट रहता है कमजोरी दूर होकर बलवान होता है अंगूर मीठे होना चाहिए, स्वाद के लिए चाहें तो शहद भी मिला सकते हैं।

हृदय रोग का इलाज

मासिक धर्म अनियमित, श्वेत प्रदर - 100 ग्राम अंगूर रोज खाते रहने से मासिक धर्म नियमित रूप से आता है। इससे स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। मासिक धर्म में होने वाला दर्द बंद हो जाता है और सफ़ेद पानी (श्वेत प्रदर) की शिकायत भी नहीं रहती l इसके लिए यह एक अच्छा टॉनिक है।
गुर्दे का दर्द - अंगूर की बेल के 30 ग्राम पत्तों को पीस कर, पानी मिलाकर छान कर, नमक मिलाकर पीने से गर्दे के तड़़पते रोगी को आराम मिलता है। बार-बार पेशाब जाना मूत्राशय के लिए अच्छा नहीं है। अंगर खाने से बार-बार पेशाब जाना कम हो जाता है l 

नकसीर - मीठे अंगूर का रस नाक से खींचने से नकसीर तुरन्त बन्द हो जाती है। फेफड़ों के सब प्रकार के रोग- यक्ष्मा, खाँसी, जुकाम, दमा आदि के लिए अंगूर बहुत अच्छा है।

दूध वृद्धि - अंगूर खाने से दूध में वृद्धि होती है, कम दूध वाली स्त्री को यह खाने चाहिए।

शक्तिवर्धक - ताजे अंगूरों का रस कमजोर रोगी के लिए लाभदायक है। यह रक्त बनाता है और रक्त पतला करता है, शरीर मोटा करता है। दिन में दो बार रोज अंगूर का रस पीने से पाचन शक्ति ठीक होती है, कब्ज़ दूर होती है, गैस नहीं बनती। यह जल्दी पचता है l इससे दुर्बलता दूर होती है, सिर दर्द, बेहोशी के दौरे, चक्कर आना, छाती के रोग, क्षय में उपयोगी हैं। खून साफ करता है। शरीर में व्याप्त विषों को बाहर निकालता है। श्वेत प्रदर में लाभ होता है। गर्भ का बच्चा स्वस्थ, बलवान होता है। अंगूर रक्त को लोहा देता है।

शरीर के घाव - नियमित अंगर खाने से किसी भी प्रकार के घाव ठीक हो जाते हैं। अंगूर शरीर की आंतरिक शक्ति (इम्युनिटी पावर)को बढ़ाता है l 

नशीले पदार्थ - सिगरेट चाय, काफी, जर्दा, शराब, की आदत केवल अंगूर खाकर रहने से छूट जाती है।

अंगूर की खेती कहां होती है, अंगूर की किस्में कई प्रकार की होती है l

अंगूर सबसे अधिक पाए जाने वाले क्षेत्रो में महाराष्ट्र और तमिलनाडु है l इन दो राज्यों में अंगूर सर्वाधिक खेती होती है अंगूर में अनेक प्रकार की किस्में होती है l जो इस प्रकार है

अंगूर की किस्में - अनब-ए-शाही, बंगलौर ब्लू, भोकरी, गुलाबी, काली शाहबी, परलेटी, थॉम्पसन सीडलेस, शरद सीडलेस, अरकावती, अरका हंस, अरका कंचन, अरका श्याम, अरका नील मणि, अरका श्वेता, अरका राजसी, अरका चित्रा, अरका कृष्णा, अरका सोमा, अरका तृष्णा इसके अलावा भी विदेशी किस्में पायी जाती है l

कोई टिप्पणी नहीं:

Blogger द्वारा संचालित.