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Health benefits of orange | हेल्थ टिप्स | स्वास्थ्य पत्रिका

नारंगी के बारे में जानकारी, Information about orange

नारंगी (Orange) का वैज्ञानिक नाम साइट्रस रेटिक्युलेटा (citrus reticulata) है l नारगी या सन्तरा ठण्डा, तन और मन को प्रसन्नता देने वाला है। उपवास और सभी रोगों नारंगी दी जा सकती है। जिनकी पाचन-शक्ति खराब हो, उनको नारंगी का रस तीन गुने पानी में मिलाकर देना चाहिए। नारंगी प्रातः भुखे पेट या खाना खाने के पाँच घण्टे बाद सेवन करने से सर्वाधिक लाभप्रद है l एक व्यक्ति को एक बार में एक या दो नारंगी लेना पर्याप्त है। नारंगी में विटामिन सी' प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा नारंगी के फलों में कार्बोहाइड्रेट, कैल्सियम, लौह, फास्फोरस, विटामिन, बी और ए भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है एक व्यक्ति को जितने विटामिन सी' की आवश्यकता होती है, वह एक नारंगी प्रतिदिन खाते रहने से पूर्ति हो जाती है। नारंगी रक्त की सफाई भी करती है।
नारंगी के फायदे, नारंगी के औषधि गुण
नारंगी 

दुर्बल रोगी, गर्भवती महिलाओं, बच्चों और वृद्धजन के लिए इसका रस पीना लाभकारी होता है। नारंगी मधुर किंचित अम्ल, ह्रदय, मस्तिष्टक और स्नायु संस्थान को बल देने वाली होती है। 

बवासीर, पेट में आफरा आना, रक्तचाप वृद्धि, चर्म रोग, यकृत विकार, पायेरिया, मूत्र रोगों और वृक्कों के लिए उदर रोगों में भी यह हितकारी है। 

संतरे के औषधीय गुण, santare ke aushdhiya gun 

चेचक के दाग - नारंगी के छिलके सुखा कर पीस लें। इसके चार चम्मच में गुलाब-जल मिलाकर पेस्ट बनाकर नित्य चेहरे पर मलें । चेचक के दाग हलके पड़ जायेंगे । इस तरह आप संतरे के छिलके का उपयोग कर सकते है छिलके को काम में ले सकते है 
संतरे खाने के लाभ
संतरे का पेड़ 

मुँहासे - नारंगी के सूखे छिलके पीस कर चेहरे पर मलने से मुँहासे दूर हो जाते हैं।त्वचा के लिए नारंगी उपयोग कर सकते है 

गुर्दे (Kidney) के रोग - प्रातः नाश्ते से पहले 1-2 नारंगी खाकर गर्म पानी पीने या नारंगी का रस पीने से गर्दे के रोग ठीक हो जाते हैं। गुर्दे के रोगों से बचाव होता है। नारंगी गुर्दो को स्वच्छ रखने में उपयोगी है। सेव और अंगूर भी समान लाभ पहुँचाते हैं। गुर्दों को स्वस्थ रखने के लिए प्रातः भूखे पेट फलों का रस उपयोगी है।

खाँसी-जुकाम - खाँसी, जुकाम होने पर नारगी के रस का एक गिलास नित्य पीने से लाभ होगा। स्वाद के लिए नमक या मिश्री डाल कर पी सकते हैं । सर्दी, खाँसी होने पर गर्मी में ठण्डे पानी के साथ और सर्दी में गर्म पानी से नारंगी का रस पीने से लाभ होता है।

बच्चों का पौष्टिक आहार, bachcho ka poshtic aahaar 

बच्चों का सर्दी से बचाव - बच्चों को नियमित रूप से मीठी नारंगी का रस पिलाते रहने से सर्दी की ऋतू की कोई भी बीमारी नहीं होती। दूध-पीते बच्चों के लिए यह लाभदायक है।  बच्चों में ताकत आती है।
बच्चों का पौष्टिक आहार
Baby food 
बच्चों का पौष्टिक भोजन - बच्चे को जितना दूध पिलायें उसमें उस दूध का एक हिस्सा सीठी नारंगी का रस मिला कर पिलायें। यह बच्चों का पौष्टिक पेय है। इससे शरीर का वजन भी बढ़ता है।

गर्भावस्था के दौरान सुंदर बच्चे के लिए आहार

गर्भावस्था का भोजन - गर्भवती स्त्री को नित्य दो नारंगी दोपहर में पूरे गर्भकाल में खिलाते रहने से होने वाला शिशु सुन्दर होता है।
गर्भावस्था में क्या भोजन करे
प्रेगनेंसी 

शिशु-शवितवर्धक - बच्चों को नारंगी का रस पिलाते रहने से वे थोड़़े ही समय में मोटे-ताजे हो जाते हैं तथा उनका पोषण द्रुतगति से होता है। हड्डियों की कमजोरी और टेडापन दूर हो जाता है तथा हड्डियाँ मजबूत हो जाती हैं। बच्चे शीघ्र चलने-फिरने लगते हैं। डिब्बे या गाय का दूध बोतल से पीने वाले बच्चों को तो नारंगी का रस निरन्तर पिलाना आवश्यक है। इसके रस से सूखा रोग-ग्रस्त बच्चे मोटे-ताजे हो जाते हैं। इसका रस आंतो की गति को तेज करता है।

बच्चों उलटी में नारंगी का रस दूध में मिलाकर पिलाने से लाभ होता है। जी मिचलाने पर नारंगी के सेवन से लाभ होता है। मोटर आदि से यात्रा करते समय नारंगी का सेवन करते रहना चाहिए।

दुर्बलता दूर करना -  दुर्बल व्यक्ति एक गिलास नांरगी का रस सुबह, एक दोपहर में नित्य कुछ संप्ताह पीते रहें तो शरीर में ताकत आ जाती है। जो बच्चे बोतल से दूध पीते हैं कमजोर रहते हैं, उनके लिए नारंगी का रस बहुत लाभदायक है।

शराब छुड़ाना - नाश्ते से पहले नारंगी खाने से शराब पीने की इच्छा घटती है।

सूची
रक्तदान के फायदे और नुकसान 
नींबू का सेवन करने के फायदे और नुकसान 
केला खाने के फायदे, केला कब खाना चाहिए 
प्याज़ का सेवन करने का अद्भुत फायदे 
आंवला के फायदे और नुकसान 
टमाटर खाने के फायदे और नुकसान
जल्दी बुढ़ापा आने का कारण और उपाय 
गाजर खाने  के फायदे और नुकसान
स्पंदनदोष क्या है कारण और निवारण 
आलू के फायदे तथा औषधीय गुण
बुढ़ापा क्या है बुढ़ापा रोकने के उपाय
पायोरिया में नित्य नारंगी खाने से लाभ होता है। नारंगी के छिलकों को छाया में सुखाकर पीस लें। इससे रोज मञ्जन करें।

मधुमेह (Diabetes) - इसके रोगी को नारंगी कम मात्रा में दे सकते हैं ।

टाइफाइड (Typhoid) - नारंगी गर्मी, बुखार और अशान्ति दूर करती है। रोगी को दूध में नारंगी का रस मिलाकर पिलायें या दूध पिलाकर नारंगी खिलायें। दिन में कई बार नारंगी खिलानी चाहिए। रोगी को नारंगी खिला कर दूध पिलायें । इससे ऊष्मा कम होती है, मूत्र एवं मल (लेट्रिन) खुल कर होता है। प्यास अधिक लगने पर नारंगी खाने से प्यास कम होती है।

मलेरिया - दो नारंगी के छिलके दो कप पानी में उबालें। आधा पानी रहने पर छानकर गर्म-गर्म पीयें। इससे मलेरिया में लाभ होगा l 

 पेट के रोग - नारंगी के सेवन से यकृत रोग ठीक होते हैं। गैस या किसी भी कारण से जिनका पेट फूलता हो, भारी रहता हो, अपच हो, उनके लिए यह लाभकारी है, सुबह नारंगी के रस का एक गिलास पी लिया जाये तो आँतें साफ हो जाती हैं, जिससे कब्ज़ नहीं रहती।
पेट दर्द का ईलाज
पेट दर्द 

अल्सर  (Peptic Ulcer) - पेट में घाव, व्रण, नासूर हो तो नारंगी का सेवन उपयोगी है। नारंगी खाने से घाव जल्दी भरते हैं पीलिया में नारंगी का सेवन लाभदायक है।

कुब्ज - सुबह नाश्ते में नारंगी का रस कई दिन तक पीते रहने से मल (लेट्रिन) प्राकृतिक रूप से आने लगता है। यह पाचन-शक्ति बढ़ाती है। नारंगी का रस वेरी-बेरी रोग, स्कबी, जोड़ों का दर्द, शोथ में लाभप्रद है। यह हदय, मस्तिष्क और यकृत को शक्ति और स्फर्ति देता है।

दूध पीने से गैस बनना -  जिन्हें दूध पीने से गैस बनती है, उन्हें दूध के साथ नारंगी देने से गैस नहीं बनती।

भूख न लगना - नारंगी की कलियों पर पसी हुई सौठ तथा काला नमक डाल कर खायें । एक सप्ताह में ही भूख अच्छी लगने लगेगी। सुबह भूखे-पेट दो नारंगी नित्य खाने से भूख अच्छी लगती है। इससे पेट की गड़बड़ ठीक हो जाती है।

वक्षरोग (Chest Diseases) - श्वास, टी.बी.,हृदय और छाती के सभी रोगों में नारंगी लाभदायक है ।

मवखी, मच्छरनारंगी के सूखे छिलकों को जलते हुए कोयलों पर डाल दें । इसका धुआँ चमकदार और सुगन्धित होगा, जिससे मक्खी, मच्छर आस-पास में नहीं रहेंगे। जहाँ की खटमल हों, वहाँ नारंगी के छिलके रखें, खटमल वहाँ नहीं रहेंगे।


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