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स्पंदनदोष क्या है कारण और निवारण - स्वास्थ्य पत्रिका

स्पंदनदोष क्या है? Spandhandosh kya hai

आधुनिक युग में हमारी खान-पान और रहन-सहन में आये बदलाव और भोजन में पौष्टिकता काम होती जा रही है भोजन केमिकल युक्त होता जा रहा है l ओमेगा-3 की भारी कमी आने के कारण पुरुषों में स्तंभनदोष की समस्या बहुत बढ़ती जा रही है। यौन उत्तेजना पर यदि शिश्न में इतना फैलाव और कड़ापन भी नहीं आ पाये कि सम्पूर्ण शारीरिक सम्बन्ध स्थापित हो सके, तो इस अवस्था को स्तंभनदोष कहते हैं।

स्पंदनदोष क्या है, क्यों होता है?
स्पंदनदोष क्या है?

स्पंदनदोष होने का मुख्य कारण क्या, sapandan dosh ka mukya karan 

स्पंदनदोष का मुख्य कारण गलत खान-पान, गलत दिनचर्या, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, ब्लडप्रेशर, डिप्रेशन आदि में दी जाने वाली दवाइयां इत्यादि है। यह ऐसा रोग है जिस पर खुलकर चर्चा बहुत कम होती है। सेक्स की चर्चा करने में हम शर्म तथा झिझक महसूस करते हैं। सेक्स स्वाभाविक, प्राकतिक, शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया है। यह सभ्य समाज के निर्माण हेतु हमारा परम कर्त्तव्य है। सेक्स विवाह का अनूठा उपहार है l ईश्वर की सबसे प्रिय इस धरा के संचालन का प्रमुख माध्यम है। सेक्स सम्बन्धी समस्याओं के निवारण के लिये व्यापक चर्चा होनी चाहिये।


स्पंदनदोष होने का कारण क्या, spandan dosh hone ka karan 

खान-पान - आज के युग में खाना केमिकल युक्त होता जा रहा है l खेती में अंधाधुंध यूरिया, जहरीली दवाइयों का प्रयोग हो रहा है, जिसके कारण भोजन केमिकल युक्त हो रहा है l जो स्पंदनदोष का मुख्य कारण है l भाग दौड़ भरी जिंदगी में किसी के पास समय नहीं है की वह शांति से बैठकर भोजन करे जो भोजन जल्दी बनकर तैयार हो जाता है जैसे,  पिज़्ज़ा, बर्गेर, पावभाजी, ब्रेड, बैक्समोसा इत्यादि l ये सभी फास्टफूड  डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, ब्लडप्रेशर, डिप्रेशन, मोटापा इत्यादिगंभीर बीमारियों का घर है l
इन्ही के कारण पेट की बीमारिया जैसे पेट दर्द, अपच, दस्त, बदहजमी जैसे बीमारिया होती है l

स्पंदनदोष क्यों होता है

रहन-सहन - आज के समय में व्यक्ति की जरुरते इतनी बढ़ गयी है व्यक्ति आराम भी नहीं कर पाता रात दिन मारा मारा फिर रहा है l घर परिवार को समय भी नहीं दे पा रहा है l सोने के समय पर जागना, जागने के समय पर सोना ठीक से पूरी नींद भी नहीं ले पा रहा है l हमेशा ऑफिस के काम में व्यस्त रहता है चिंता, तनाव में रहता है l जिसके कारण वह  स्पंदन दोष का शिकार होता जा रहा है l वैवाहिक जीवन का आनंद नहीं ले पा रहा है l 


दवाइयांडायबिटीज, उच्च रक्तचाप, डिप्रेशन आदि रोगों की अधिकतर दवाइयां आदमी को नपुंसक बना देती है।

स्तंभनदोष का उपचार, spandandosh ka upchar 

सिलडेनाफिल (वियाग्रा), टाडालाफिल, वरडेनाफिल आदि को स्तंभनदोष की महान चमत्कारी दवा के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। वियाग्रा के सेवन से प्रचण्ड स्तंभन होता है। इन्हें बेचकर फाइजर और अन्य कम्पनियां खूब पैसा बना रही है। इसके गैरकानूनी तरीके से प्रचार के लिये 2009 में फाइजर को भारी जुर्माना भरना पड़ा था l

इन दवाइयों के साइड इफ़ेक्ट, dawaiyo ke side effect 

इन दवाओं के कुछ घातक दुष्प्रभाव भी हैं हृदय रोगी इस दवा को नहीं लें, इससे हृदय को भारी क्षति पहुँचाती है। इसके सेवन से हृदय में ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है, इससे आपके फेफड़ों में रक्तस्राव भी हो सकता है और संक्रमण का खतरा बना रहता है l व्यक्ति अचानक बहरा हो सकता है l इसका सबसे घातक दुष्प्रभाव है l आपको मृत्यु मालूम होगा कि अमेरिका में सन 1998 में वियाग्रा के सेवन से 69 लोगों की मृत्यु हुई थी।

इंजेक्शन देता है सेटिसफेक्शन- नब्बे के दशक में वैज्ञानिकों ने स्तंभनदोष के उपचार के लिये लिंग में लगाने के इंजेक्शन भी इजाद कर लिये थे। इनकी सफलता दर 95 प्रतिशत है। चिकित्सक इसके लिये पेपावरिन, फेंटोलेमीन या एलप्रोस्टेडिल आदि के इंजेक्शन प्रयोग करता है। रोगी की अनुमति मिलते ही वह रोगी के लिंग में सुई लगा देता है। इसका प्रभाव शीघ्र ही दिखाई देने लगता है।
इसके अलावा रक्त-वाहिकाओं को फैलाने वाली एल्प्रोस्टेडिल की एक चावल के दानें जितनी छोटी टिकिया को मूत्रमार्ग में प्लास्टिक की छोटी सी सीरिंज द्वारा घुसा दिया जाता है। इसके बाद शिश्न को थोड़ा अंगलियों से दबाना तथा सहलाना पड़ता है। ताकि दवा पूरे शिश्न में फैल जाये । 10 मिनट बाद लिंग में प्रचण्ड स्तंभन होता है जो एक घंटे तक बना रहता है।
इसके भी कुछ दुष्प्रभाव हैं जैसे अविरत शिश्नोत्थान, शिश्न का टेढा होना या अचानक रक्तचाप कम हो जाना आदि। 

कृत्रिम लिंग प्रत्यारोपण-  (1) यह प्रत्यारोपण दो तरह का होता है। पहला घुमाने वाला होता है। प्रत्यारोपण के लिंग को घुमाकर स्तंभन की स्थिति लाते ही यह स्थिर हो जाता है। संसर्ग के बाद बाद में घुमा कर पुन: इसे विश्राम की अवस्था में ले जाते हैं। 
(2) दूसरा बिलकुल प्राकृतिक तरीके से काम करता है। संसर्ग से पहले अण्डकोष की थैली में प्रत्यारोपित किये गये पम्प को दबा-दबा कर शिश्न में प्रत्यारोपित सिलीकोन रबर के दो लम्बे गुब्बारों में द्रव्य भर दिया जाता है, जिससे कठोर स्तंभन होता है संसर्ग के बाद अण्डकोष की थैली में ही एक घुंडी को घुमाने से लिंग में भरा द्रव्य वापस अपने रिजर्वायर में चला जाता है। 

इसके भी कई घातक दुष्प्रभाव हैं। जैसे पूरी सावधानियां रखने के बाद भी यदि संक्रमण हो जाये तो रोगी को बहुत कष्ट होता है और उपचार के लिये भारी कीमत चुकानी पड़ती है। संक्रमण के कारण गैंग्रीन हो जाने पर कभी-कभी शिश्न का कुछ हिस्सा काटना भी पड़ सकता है। सर्जरी के बाद थोड़े दिन दर्द रहता है, परन्तु यदि दर्द ज्यादा बढ़ जाये और ठीक नहीं हो तो कृत्रिम शिश्न को निकालना भी पड़ सकता है। जिससे रोगी को बड़ा कष्ट होता है। 
आयुर्वेदिक उपचार
स्तंभनदोष के उपचार हेतु आयुर्वेद में कई शक्तिशाली औषधियां हैं जैसे शिलाजीत,  केशर, सफेद मुसली, अश्वगंधा, शतावरी, आदि। शिलाजीत महान आयुवर्धक रसायन है जो स्तंभनदोष के साथ-साथ उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा आदि रोगों का उपचार करता है और साथ ही वृक्क, मूत्रपथ और प्रजनन अंगों का कायाकल्प करता है।
आप निम्न बातों को भी हमेशा ध्यान में रखिये- 
ब्लड शुगर और रक्तचाप को कण्ट्रोल रखे। अगर लगातार ऐसा रखेंगे तो तंत्रिकाओं व रक्तवाहिनियों में वह गड़बड़ी नहीं आयेगी जो सेक्स क्षमता को प्रभावित करती है। 

मधुमेह के मरीज तम्बाकू सेवन ना करे। तम्बाकू रक्तवाहिनियों को धूम्रपान संकरा बनाकर उनमें खून के बहाव को कम या बंद कर देता है। 

शराब का सेवन न करे। यह है मधुमेह मरीजों की सेक्स क्षमता को घटाता और रक्तवाहिनियों को नुक्सान पहुँचाता है। अगर पीना जरूरी है तो पुरुष एक दिन में दो पैग और महिलायें एक से ज्यादा नहीं लें l 

नियमित रूप से ध्यान करे और योग करें। सुबह घूमने जाएं। इससे आप शारीरिक रूप से स्वस्थ और तनावमुक्त रहेंगे। रात्रि में ज्यादा देर तक काम नहीं करें, समय पर सो जायें और पर्याप्त नींद लें लगभग 6-8 घंटे। सप्ताह में एक बार हर्बल तेल से मसाज करवायें। मसाज से यौन ऊर्जा और क्षमता बढ़ती है। यदि आपका वजन ज्यादा है तो वजन कम करे l 

संभोग भी दो या तीन दिन में करें। और सहज रखें। घर का वातावरण खुशनुमा गर्म, मसालेदार, तले हुआ  खाना न खाये। पेट साफ रखें।


स्पंदनदोष का उपचार क्या है

स्पंदन दोष से मुक्ति दिलाती है अलसी spandan dosh se mukti dilati hai alsi 

आपकी सारी सेक्स सम्बन्धी समस्यायें आपका हर्बल चिकित्सक अलसी खिलाकर ही दुरुस्त कर देगा, क्योंकि अलसी आधुनिक युग में स्तंभनदोष के साथ-साथ शीघ्रस्खलन, दुर्बल कामेच्छा, गर्भपात, बांझपन,  दुग्धअल्पता की महान आयुर्वेदिक औषधि है। सेक्स सम्बन्धी समस्याओं के अन्य सभी उपचारों से और सुरक्षित है अलसी। बस, 2-3 चम्मच रोज लेनी है।
अलसी आपको और आपके जीवनसाथी की त्वचा को आकर्षक, कोमल, नम, बेदाग व गोरा बना देगी। आपके बाल काले, घने, मजबूत, रेशम की तरह चमकदार हो जायेंगे। आपके शरीर को अलसी ऊर्जावान, बलवान और मसल्स बना देगी। शरीर में चुस्ती-फुर्ती बनी रहेगी,  न कभी थकावट होगी, न क्रोध आयेगा और मन शांत, सकारात्मक और दिव्य हो जायेगा।
मछली में ओमेगा -3 पाया जाता है जो लोग शुद्ध शाकाहारी है वो अलसी खा कर ओमेगा 3 का लाभ उठा सकता है l अलसी में ओमेगा-3 फैट, जिंक और मेगनीशियम आपके शरीर में पर्याप्त टेस्टोस्टिरोन हॉर्मोन और उत्कृष्ट श्रेणी के फेरोमोन (आकर्षण के हॉमर्मोन) स्त्रावित होंगे। टेस्टोस्टिरोन से आपकी कामेच्छा चरम स्तर पर होगी। आपके साथी से आपका प्रेम बढ़ेगा। आपका मनभावन व्यक्तित्व, मादक मुस्कान और षटबंध उदर देखकर आपके साथी की कामाग्नि भी भड़क उठेगी। अलसी में ओमेगा-3 फैट, आर्जिनीन एवं लिगनेन जननेन्द्रियों में रक्त के प्रवाह को बढ़ा देती हैं, जिससे शक्तिशाली स्तंभन तो होता ही है, इसके साथ ही उत्कृष्ट और गतिशील शुक्राणुओं का निर्माण होता है। आपकी शिथिल पड़ी क्षतिग्रस्त नाड़ियों का कायाकल्प हो जायेगा जिससे सूचनाओं एवं संवेदनाओं का प्रवाह दुरुस्त हो जाता है।



शरीर की नाड़ियो को स्वस्थ रखने में अलसी में उपलब्ध लेसीथिन, विटामिन बी ग्रप. बीटा केरोटीन, कॉपर, फोलेट आदि की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। ओमेगा-3 फैट के अलावा सेलेनियम और जिंक प्रोस्टेट के रखरखाव, स्खलन पर नियंत्रण, टेस्टोस्टिरोन और शुक्राणुओं के निर्माण के लिये बहुत आवश्यक है। अलसी लिंग की लम्बाई और मोटाई भी बढ़ाती है। अलसी के सेवन से कैसे प्रेम और यौवन की रासलीला सजती है, घोड़े के समान स्तंभन होता है, जब तक सेक्स का चरम सुख का अनुभव ना हो सम्भोग का दौर चलता है, शरीर के सभी चक्र खुल जाते हैं, पूरे शरीर में आलौकिक ऊर्जा का प्रवाह होता है सम्भोग एक यांत्रिक क्रीड़ा न रहकर एक आध्यात्मिक उत्सव बन जाता है l समाधि का रूप बन जाता है l



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