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जल्दी बुढ़ापा आने के कारण और निवारण - स्वास्थ्य पत्रिका

जल्दी बुढ़ापा आने के कारण क्या है? उपाय बताइये l

हम सब जानते है कि उम्र को रोका नहीं जा सकता है l समय के अनुसार शरीर के कलपुर्जे घिस जाता है l प्रकृति के अनुसार शारीरिक को मरना ही पड़ता है यह एक ऐसा सत्य जिसे कोई झुठला नहीं सकता है जिसने जन्म लिया उसका मरना निश्चित है l लेकिन वहां दुखी, निराश तथा रोगों से घिरा हुआ नहीं होना चाहिए l इस लेख में बुढ़ापे को रोकने का या बुढ़ापे पर लगाम लगाने का कोई तरीका नहीं है, हां अगर आप अपनी दिनचर्या में बदलाव करे, अच्छी आदतों तो अपनाये तो आपका बुढ़ापा आसान हो सकता है l लेकिन थोड़ा सा समय एवं परिश्रम लगाकर आप अपने जिंदगी के कुछ साल आसानी से बढ़ा सकते है, एक जन्मदिन से दूसरे जन्मदिन को आसानी से मिला सकते हैं l दुख की बात ये है कि उम्र बढ़ने के पूर्व वृद्धावस्था के प्रति हमारी लापरवाही व खानपान के गलत तरीकों का परिणाम है l

जल्दी बुढ़ापा आने का कारण और उपाय
बुढ़ापा रोकने के उपाय

आयुर्वेद में शरीर के मुख्य 7 तत्व और 6 रस 

आयुर्वेद में शरीर में सात मुख्य तत्वों का वर्णन है, जिनको धातु कहा जाता है। रस, रक्त, माँस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र, इन समस्त धातुओं के तत्व से धातु की उत्पत्ति होती है। यह धातु ही आयु, बल तथा यौवन को बढ़ाकर बुढ़ापे और व्याधियों से दूर रखता है।


संसार में विद्यमान समस्त पदार्थों में मधुर (मीठा), अम्ल (खट्टा) लवण (नमकीन), कटु (चटपटा), तिक्त (तीखा), कषाय (कसैला) छह रस होते हैं।

मधुर, अम्ल तथा लवण रसों वाले भोजन में कफ की वृद्धि होती है तथा वायु का शरमन होता है। कटु, तिक्त और कषाय भोजन वायु को बढ़ाता है तथा कफ को कम करता है। इसी भांति कटु, अम्ल तथा लवण पित्त को उत्पन्न करते हैं तथा तिक्त, कषाय और मधुर रस पित्त को समाप्त करते हैं।

कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, खनिज लवण और पानी का भोजन में होना नितांत आवश्यक है। आंवला, लहसुन, प्याज, करेला, दालें, हरी सब्जियां, अंकुरित अनाज पोषक तत्त्वों से भरपूर होते हैं। घी, दूध, शहद, को मक्खन, दही आदि भोज्य पदार्थ आयु बढ़ाते हैं। लगातार दूध पीने से बल बढ़ता है। आयु-बलवर्द्धक को आयुर्वेद में घी तथा दूध माना गया है। मिठाई और शक्कर का अधिक प्रयोग किया जाये तो आलस्य, मोटापा, स्वरभेद, अरुचि, मूत्र रोग, नेत्र रोग आदि रोग घेर लेते हैं। खट्टे पदार्थ ज्यादा लेने पर पित्त की वृद्धि होती है और खून को प्रदूषित करते हैं। नमक का ज्यादा सेवन अत्यधिक हानिकारक है, इससे अम्लपित्त, गठिया, रक्तपित्त, नपुंसकता, गंजापन आदि रोग उत्पन्न हो जाते हैं। कटु और कषाय रसों को लेने से भी वातज रोग हो जाते हैं। अत: भोजन छह रस युक्त होना ही लाभकारी है।

बुढ़ापा को कैसे रोके


इन आदतों के कारण रोग नजदीक नहीं आता 

सच बोलना, निंदा न करना, क्रोध न करना, अहिंसक प्रवृत्ति, पर्याप्त नींद का सेवन, धार्मिक स्वभाव, ज्ञान-विज्ञान में दिलचस्पी आदि सभी शुद्ध आचार हैं। यह एकदम ही सत्य है, जो लोग प्रात:काल उठकर दिनचर्या से निवृत्त होकर वक्त पर स्नान कर पूजा-उपासना करते हैं, उनके नजदीक रोग कभी भी नहीं फटकते हैं।

जवान दिखने के लिए इन आदतों को अपनायें 
आप हमेशा जवान रहना चाहते या दिखना चाहते है तो अपनी दिनचर्या में बदलाव करे, सभी बुरी आदतो को छोड़ दे, सुबह जल्दी उठना , बेड टी लेना छोड़ दे, मॉर्निंग में टहलना शुरू करे, व्यायाम करे या सूर्य नमस्कार करे l

पौष्टिक आहार ले, तेल युक्त भोजन से पहरेज करे, बाहर का खाना और फास्टफूड खाना छोड़ दे l आपको ज्ञात होगा बुढ़ापा का और बीमारिया का मुख्य कारण फास्टफूड्स ही है l अगर आपको बहार का खाना खाना ही पड़ रहा है तो होटल या रेस्टोरेंट में जाकर खाये, टिफिन न मंगवायें l नींद के लिए पर्याप्त 6-8 घंटे का समय निकाले l आपकी नींद अगर पूरी नहीं होती है तो पूरा दिन ख़राब हो जाता है l आपको अनिद्रा, बेचैनी, आँखे दर्द करना, आँखों का लाल होना, दिन में नींद आना, थकान होना इत्यादि रोगों का सामना करना पड़ सकता है l

बुढ़ापे को दूर रखना है तो इन आदतों को छोड़ दे 

बुढ़ापे में भी जवान बने रहने के लिये आवश्यक है कि आप सुबह उठकर शीतल पानी पीयें तथा बैड-टी नहीं लें, क्योंकि बैड-टी की आदत से पेट में कब्ज पैदा होती है।  सुबह घूमना एक अच्छा व्यायाम है। घूमे के बाद मालिश करें। फिर 20-25 मिनट के बाद ठन्डे पानी से स्नान करें। सर्दी ज्यादा हो, तो गुनगुने पानी से ही स्नान करना चाहिये। उसके बाद ईश्वर वंदना जरूर करें। शाम को सोते समय त्रिफला चूर्ण सप्ताह में दो-तीन दिन तक लें ताकि पेट साफ रहे, रात को कम से कम आठ घंटे सोयें।

बुढ़ापे को कैसे जीये

बुढ़ापे को आसान बनाना है तो बुढ़ापे के बारे में पहले सोचे 

आपका का बुढ़ापा ठीक से गुजरे, इसके लिये जरुरी है कि युवावस्था से ही अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित एवं संतुलित रखा जाये । प्रायः ऐसा देखा जाता है कि युवावस्था में व्यक्ति सभी तरफ से लापरवाह होकर अनेक प्रकार के बुरी आदतों  से ग्रस्त हो जाता है। धूम्रपान तथा मदिरापान करते समय उसे इस बात का अंदाजा नहीं होता है कि इससे फेफड़े तथा लीवर खराब हो सकते हैं। समय-असमय और मनमर्जी का खाते रहने से पाचन शक्ति दुष्प्रभावित होती है। युवावस्था में इन सबका कोई विशेष असर दिखाई नहीं देता है, किन्तु जैसे-जैसे बुढ़ापा निकट आने लगता है, वैसे-वैसे शरीर के अवयव एवं आंतरिक शक्ति कमजोर होने लगती हैं। ऐसी स्थिति में युवावस्था में किये गये गलत आचरण का प्रभाव शरीर पर दिखाई देने लगता है। शरीर अनेक रोगों से ग्रस्त होकर जीवन को दुःखों से भर देता है, इसलिये यह आवश्यक है कि आप अभी से यह विचार करें कि अगर बुढ़ापे को सुख से व्यतीत करना है, तो किसी भी प्रकार के व्यसन अथवा अनियमित दिनचर्या से दूर रहें।

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