सौंफ एक मसाला है हर घर में पाया जाता है l सौंफ को सामान्यतः भोजन के बाद माउथ फ्रेशनर के रूपये में किया जाता है l आइये जानते है सौंफ के सेहत के राज तथा सौंफ स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत ही गुणकारी है l सौंफ खाने के फायदे तथा घरेलु नुस्खे के बारे में जानते है l सौंफ को मिश्री के साथ तथा उबाल कर सौंफ का पानी पीने के बहुत फायदे होते है l 

खाली पेट सौंफ खाने के फायदे

पेचिश रोग से छुटकारा - (पेचिश में सौंफ और मिश्री खाने के फायदे)भुनी हुई सौंफ और मिश्री समान मात्रा में पीसकर हर दो घंटे से 6 बार दो दो चम्मच की ठन्डे पानी से फंकी लेने से मरोड़दार दस्त, आंव और पेचिश में लाभ होता है l 

आंव - सौंफ का तेल 5 बून्द आधा चम्मच चीनी पर डाल कर रोजाना चार बार लेने से आंव बंद हो जाती है l 

दस्त - यदि मरोड़ देकर थोड़ा थोड़ा दस्त आता हो तो 3 ग्राम कच्ची और 3 ग्राम भुनी हुई सौंफ मिश्री के साथ मिलाकर दे l दस्त बंद हो जायेंगे l 

छोटे बच्चों के पतले दस्त, पेचिश में 6 ग्राम सौंफ 80 ग्राम पानी में उबाले l ज़ब पानी आधा रह जाये तब उसमे एक ग्राम काला नमक डाल दे बच्चों को 12 ग्राम पानी दिन में तीन बार देने से बहुत लाभ होता है l 

सरलता से दाँत निकलना - बच्चों के दाँत निकलते समय यदि रोता हो तो गाय के दूध में मोटी सौंफ उबालकर, छान कर बोतल में भर ले, एक एक चम्मच चार बार पिलाये l इससे दाँत सरलता से निकल आएंगे l 

बच्चों की देखभाल

बच्चों का पेट फूलना - रात को एक चम्मच सौंफ आधा कप पानी में भिगो दे प्रातः सौंफ को मसलकर छान ले l इस पानी को दूध में मिलाकर पिलाने से बच्चों का पेट फूलना, गैस, और पेट दर्द ठीक हो जाता है l 

खुजली - सौंफ और धनिया समान मात्रा में पीस ले l इसमें डेढ़ गुना घी और दो गुना चीनी मिलाकर रखे l सुबह शाम 30-30 ग्राम खाये l हर प्रकार की खुजली में लाभ होगा l 

पेट का भारीपन - नींबू के रस में भीगी हुई सौंफ को भोजन के बाद खाने से पेट का भारीपन दूर होता है l भूख खूब लगती है तथा मल भी साफ होता है l 

नेत्रज्योति बढ़ाना - भोजन के बाद एक चम्मच सौंफ खाने से पाचन और नेत्रज्योति बढ़ती है तथा पेशाब खुलकर आता है l सौंफ पीस ले, रात को सोते समय आधा चम्मच सौंफ एक चम्मच शक़्कर मिलाकर दूध से फंकी ले l नेत्रज्योति बढ़ेगी l 

खांसी - दो चम्मच सौंफ, दो चम्मच अजवाइन आधा किलो पानी में उबालकर 2 चम्मच शहद मिलाकर छान ले l इसकी तीन चम्मच प्रति घंटा पिलाने से बच्चों की खानी दूर हो जाती है l

जुकाम - 15 ग्राम सौंफ और तीन लौंग आधा किलो पानी में उबाले, चौथाई पानी रहने पर देसी घी, बुरा या चीनी मिलाकर घूंट घूंट पीये l 

जुकाम का घरेलु उपचार

बुखार - तेज बुखार होने पर सौंफ पानी में उबालकर दो-दो चम्मच बार-बार पिलाते रहने से बुखार में ताप नहीं बढ़ता l 

बवासीर - सौंफ और मिश्री दोनों पीसकर आधा चम्मच की फंकी दूध के साथ ले l 

खुनी बवासीर - सौंफ, जीरा, धनिया प्रत्येक एक एक चम्मच दो कप पानी में उबाले आधा पानी रहने पर छानकर उसमे एक चम्मच देसी घी मिलाकर पिलाने से खुनी बवासीर में लाभ होता है l 

पेट दर्द - सौंफ और सेंधा नमक पीसकर दो दो चम्मच गर्म पानी से फंकी ले l पेट दर्द बंद हो जायेगा l 

मुँह के छाले - जिन लोगों के मुँह में छाले हमेशा होते रहते है वे खाने के बाद थोड़ी सौंफ खा लिया करें l इससे छाले होना बंद हो जायेंगे l 

पाचक - सौंफ और जीरा समान मात्रा में मिलाकर सेंक ले भोजन के बाद एक एक चम्मच रोज चबाये l 

गर्भपात (abortion) - गर्भधारण करने के बाद 60 ग्राम चूर्ण 30 ग्राम गुलाब का गुलकंद पीसकर पानी मिलाकर एक बार नित्य पिलाने से गर्भपात रुकता है l पुरे गर्भकाल में सौंफ का अर्क पीने से गर्भ स्थिर रहता है l 

नींद अधिक आना - जिसे नींद अधिक आती हो, हर समय नींद, आलस, सुस्ती में रहता हो l उसे 10 ग्राम सौंफ को आधा किलो पानी में उबालकर एक चौथाई पानी रहने पर थोड़ा सा नमक मिलाकर सुबह शाम 5 दिन पिलाये l इससे नींद कम आएगी l 

गहरी नींद कैसे ले

नींद कम आना - 10 ग्राम सौंफ आधा किलो पानी में उबाले चौथाई पानी रहने पर छान कर गाय का 250 ग्राम दूध और 15 ग्राम घी दोनों स्वादनुसार चीनी मिलाकर पिलाये l 

गौरी संतान का जन्म - गर्भकाल में नौ महीने तक खान-पान के बाद नित्य सौंफ चबाते रहने से गौरी रंग की संतान पैदा होती है l 

कब्ज रोग - (1) चार चम्मच सोगी एक गिलास पानी में उबाले जब आधा पानी रह जाये तो छान कर पीये कब्ज दूर हो जायेगा l

(2) सोते समय आधा चम्मच पीसी हुई सौंफ की फंकी गर्म पानी से लेने से कब्ज दूर होती है l

(3) सौंफ, हर्र, शक्कर प्रत्येक आधा चम्मच मिलाकर, पीसकर गर्म पानी से फांकी ले l 

धूम्रपान - यदि आप सिगरेट, बीड़ी पीना छोड़ना चाहते है तो सॉफ को घी में सेंक कर शीशी में भर ले l ज़ब भी सिगरेट पीने की इच्छा हो तो इस सौंफ को आधा आधा चम्मच चबाते रहे l सिगरेट पीने की इच्छा समाप्त हो जायेगी l मन पर भी सयम रखे l 

स्मरणशक्तिवर्धक - सौंफ को हलकी हलकी कूटकर ऊपर के छिलके उतारकर छान ले l इस तरह अंदर की मींगी निकालकर समान मात्रा में मिश्री मिलाकर पीस ले l एक एक चम्मच सुबह-शाम दो बार ठन्डे पानी से या गर्म दूध से फांकी ले l इसके सेवन से स्मरणशक्ति बढ़ती है l मस्तिष्क में शीतलता रहती है l 

लौंग क्या है?

लौंग सदाबहार वृक्ष की सूखी हुई पुष्प कलिका है। लौंग का अंग्रेजी नाम- क्लोव (clove) है, साइंटिफिक नाम (वैज्ञानिक नाम - साईजीगियम एरोमेटिकम (Syzygium aromaticum है l लौंग एक प्रकार का मसाला है। इस मसाले का उपयोग भारतीय पकवानो मे बहुतायत मे किया जाता है। इसे औषधि के रूप मे भी उपयोग मे लिया जाता है। लौंग अग्नि को जगाने वाली पाचक है नेत्रों के लिए  हितकारी क्षय रोग का नाश करने वाली है l लौंग का गुण होता है ये दर्द दूर करती है l 
लौंग खाने के फायदे और नुकसान

लौंग का उपयोग 

लौंग आकर में बहुत छोटा होता है लेकिन इसके उपयोग बहुत बड़े बड़े कामो में किया जाता है l पूजा पाठ, तंत्र मंत्र, काला जादू या किसी अन्य पूजा पाठ में मसाले, तथा अनेक रोगों में लौंग तथा लौंग का तेल बहुत ही रामबाण औषधि है l 

लौंग के घरेलु नुस्खे तथा उपचार 

शुद्धता की पहचान - लौंग में अर्क निकली हुई लौंग मिला देते है l यदि लौंग में झाइयाँ पड़ी हो तो समझें कि अर्क निकली हुई लौंग है l अच्छी लौंग में झाइयाँ नहीं होती है l 

खांसी में लौंग का उपयोग - लौंग और अनार के छिलके समान मात्रा में पीसकर इसका चौथाई चम्मच शहद में मिलाकर रोज दिन में तीन बार चाटने से खांसी तीज हो जाती है l 

कुकर खांसी - दो लौंग आग में भूनकर शहद मिलाकर चाटने से कुकर खांसी ठीक हो जाती है l 

सिर-दर्द का इलाज - (1) लौंग को पीसकर लेप करने से सिरदर्द तुरंत बंद हो जाता है l इसका लेप भी लगाया जा सकता है l 
(2) पांच लौंग पीसकर एक कप पानी में मिलाकर गर्म करें, आधा पानी रहने पर छान कर चीनी मिलाकर पिलाये l शाम को और सोते समय दो बार लेते रहने से  सिरदर्द ठीक हो जाता है l 

गुहेरी (stye) - आँखों पर छोटी सी फुंसिया निकलने पर लौंग घिसकर लगाने से वे बैठ जाती है तथा सूजन भी उतर जाती है l ध्यान रहे लौंग आँखों में न लगे नहीं तो आँखों में जलन होंगी l 

स्वांस नली - लौंग मुँह में रखने से कफ आराम से निकलता है तथा कफ की दुर्गन्ध दूर हो जाती है l मुँह और स्वांस की दुर्गन्ध भी इससे मिटती है l लौंग और अनार के छिलके समान मात्रा में पीसकर चुटकी भर चूर्ण शहद से रोजाना दिन में तीन बार चाटने से खांसी ठीक हो जाती है l दो लौंग तवे पर रखकर सेक कर चूसे l इससे खांसी के साथ कफ (खखार/बलगम) आना बंद हो जाता है l 

हैजा - हैजा में लौंग का पानी बनाकर देने से प्यास कम लगती है और उलटी कम होकर पेशाब आता है l 

गर्भनी का वमन - दो लौंग पीसकर शहद के साथ गर्भनी को चटाये l गर्भावस्था की 'कै' (उलटी) बंद हो जायेगी l 

प्यास अधिक लगना - प्यास अधिक लगने पर उबलते पानी में लौंग डालकर उबाले l ठंडा होने पर पिलाये l इससे प्यास कम हो जायेगी l 

जी मचलाना - दो लौंग पीसकर आधा कप पानी में मिलाकर गर्म करके पिलाने से जी मचलना ठीक हो जाता है लौंग चबाने से भी ठीक हो जाता है l 

उलटी (vomiting) - 4 लौंग कूटकर एक कप पानी में उबाले आधा कप पानी रहने पर छान कर स्वाद के अनुसार मिठा मिलाकर पी कर करवट लेकर सो जाये दिन भर में ऐसे चार मात्रा ले उल्टिया बंद हो जायेगी l 

टाइफाइड भुखार (Typhoid fever) - टाइफाइड भुखार में लौंग का पानी पिलाये l पांच लौंग दो किलो पानी में आधा पानी रहने पर छान ले l इस पानी को दिन में तीन बार पिलाये l या फिर आप पानी भी उबाल कर ठंडा करके पिलाये l टाइफाइड में आराम मिलेगा l

बुखार (fever) - बुखार होने पर एक लौंग पीसकर गर्म पानी से फंकी ले l सामान्य भुखार ठीक हो जायेगा l 

नासूर - हल्दी और लौंग पीसकर लगाने से नासूर मिटता है l 

एसिडिटी - एसिडिटी में पाचन शक्ति ख़राब रहती है दाँत भी आयु से जल्दी गिर जाते है आंखे दुखने लगती है बार बार जुखाम लगता रहता है एसिडिटी से अनेक रोग होते है l एसिडिटी के रोगी को चाय नुकसान दायक है l

(1) खाना खाने के बाद एक-एक लौंग सुबह शाम खाने से या शरबत लेने से एसिडिटी से होने वाले सभी रोगों में लभ होता है और अम्लपित्त (एसिडिटी) तीज हो जाती है l 
(2) 15 ग्राम हरे आंवले का रस, पांच पीसी हुई लौंग, एक चम्मच शहद और एक चम्मच चीनी मिलाकर रोगी को पिलाये l कुछ ही दिनों में उम्मीद से बढ़कर लाभ होगा l 
अपच, गैस - दो लौंग पीसकर उबलते हुये पानी में डालें , फिर कुछ ठंडा होने पर पी जाये यह प्रयोग दिन में तीन बार ले अपच और गैस में आराम मिलेगा l जल्दी इस परेशानी से मुक्त हो जायेगे l 

दाँतो के रोगों का इलाज 

दाँत दर्द - (1) पांच लौंग पीसकर उसमे नींबू का रस निचोड़ कर दाँतो पर मलने से दाँत दर्द ठीक हो जाता है l 
(2) पांच लौंग पीसकर एक गिलास पानी में उबालकर रोजाना तीन बार कुल्ले करने से दाँत दर्द ठीक हो जाता है l 

दाँत दर्द का इलाज

दाँत रोग - (1) दाँत में कीड़ा लगने पर लौंग को रखना या लौंग का तेल लगाना चाहिए l पान खाने से जीभ कट गयी हो तो एक लौंग मुँह में रखने से जीभ ठीक हो जाती है l 
(2) लौंग का तेल में रुई की फुरेरी भिगोकर दाँत में रखने से दाँत दर्द मिट जाता है l 

स्पर्म संख्या बढ़ाना 

जिन पुरुषो में वीर्य में स्पर्म संख्या कम है या निष्क्रिय है उन लोगो को लौंग का पानी पीना चाहिए l दो बून्द लौंग का तेल 20 ml पानी में मिलाकर पीना चाहिए l पुरुष की स्पर्म संख्या बढ़ जायगी और वीर्य शुद्ध होगा l संतान का सुख भी प्राप्त होगा l यह उपचार राजीव दीक्षित जी द्वारा परीक्षित है l  

लौंग खाने से हो सकता है नुकसान 

(1) गर्भावस्था के समय लौंग का सेवन गर्भवती महिलाओं को नहीं करना चाहिए क्योंकि लौंग की की तासीर गर्म होती है इससे गर्भवती गिरने का खतरा बना रहता है l
(2) मासिक धर्म का समय भी महिलाओं को लौंग से परहेज करना चाहिए l  

राई की गिनती सरसों की जाति में होती है। इसका दाना छोटा व काला होता है। छोटी-छोटी गोल-गोल राई लाल और काले दानों में अक्सर मिलती है। विदेशों में सफेद रंग की राई भी मिलती हैं। राई के दाने सरसों के दानों से काफी मिलते हैं। बस राई सरसों से थोड़ी छोटी होती है। राई ग्रीष्म ऋतु में पककर तैयार होती है। राई के बीजों का तेल भी निकाला जाता है। राई का वैज्ञानिक नाम - व्रासिका नाइग्रा (Bressica nigra) है l 


राई के फायदे और नुकसान

राई खाने से हो सकता है नुकसान, Eating rye can cause harm

सावधानी – राई की तासीर गर्म होती है पसीना लाने वाली होती है। इस वजह से रक्तपित्त, रक्तवात, खूनी बवासीर, शरीर में जलन, चक्कर आना, ब्लडप्रेशर बढ़ जाने पर राई के सेवन से बचना चाहिए।

राई के घरेलु औषधि उपचार, Home remedies for rye

इसका लेप करने से त्वचा लाल हो जाती है। और रक्तवाहिनियाँ उत्तेजित हो जाती हैं जिससे उस नाग में शून्यता पैदा हो जाती है।

लेप विधि - राई को ठण्डे पानी के साथ पीसें। साफ मलमल के कपड़े को जिस अंग पर लेप करना हो, बिछा दें। फिर उस कपड़े पर पिसी हई ई फैला दें, लेप कर दें। कपड़ा न रख कर लेप करने से त्वचा पर फुंसियाँ हो जाती हैं। इसे अधिक समय न रखें। लेप करीब10-15 मिनट रख सकते हैं।

अजीर्ण होने पर 3 ग्राम राई पीसकर पानी में घोल कर पीयें।

उदरशूल (Colic) और दुःसाध्य उलटियों को रोकने के लिए पेट पर राइं का लेप आश्चर्यजनक वस्तु है।

हैजा - रोगी को बहुत उलटी, दस्त होते हों और शरीर में बाँयटे आते हों, अंगों में शिथिलता पैदा हो रही हो, ऐसी स्थिति में राई का लेप बहुत लाभ देता है। हैजा के अलावा भी उलटी, दस्त होते हों, किसी औषधि से न रुकते हों तो राई के लेप से रुक जाते हैं । लेप पेट पर
करें।

विष - दो चम्मच राई का चूर्ण पानी के साथ लेने से जोरदार उलटी होकर विष का प्रभाव कम हो जाता है।

मिरगी - राई को पीस कर सुँघने से मिरगी की मूर्छा दूर हो जाती है।

मासिक धर्म में गड़बड़ी होने पर भोजन से पहले दो ग्राम राई का चूर्ण प्रथम आने के साथ खायें। मासिक धर्म खुलकर आयेगा l

जुकाम - राई को शहद में मिला कर सूँघने व खाने से जकाम मिटता है।

हिचकी - दस ग्राम राई, 250 ग्राम पानी में उबाल कर छान कर गुनगुना रहने पर पिलाने से हिचकी बन्द होती है, चाहे किसी भी कारण से हो ।


गुड़ का प्रयोग ग्रामीण इलाकों में गुड़ का उपयोग चीनी के स्थान पर किया जाता है। जानवरो को भी गुड़ खिलाया जाता है l गुड़ लोहतत्व का एक प्रमुख स्रोत है और खून की कमी (एनीमिया) के शिकार व्यक्ति को चीनी के स्थान पर इसके सेवन की सलाह दी जाती है। गुड़ के एक अन्य हिन्दी शब्द जागरी (JAGGERY) का प्रयोग अंग्रेजी में इसके लिए किया जाता है।
खाली पेट गुड़ खाने के फायदे

ईख से प्राप्त ईख का गुड़ एवं ताड़ से प्राप्त ताड़ का गुड़ कहा जाता है, ईख से प्राप्त गुड़ इतना प्रचलित है कि इसे लोग केवल गुड़ ही कहते हैं।

(1). ईख से रस निकालने का तरीका - देशी कोल्हू के द्वारा लगभग 60-65 प्रतिशत रस निकलता है। यह रस बड़े-बड़े कड़ाहों में डाला जाता है। डालते समय कपड़े से रस छान लिया जाता है, तब यह रस उबाला जाता है।

(2). रस की सफाई तथा गुड़ बनाने की विधि - रस को साफ करने के लिये प्राय: चूने का उपयोग किया जाता है। चूना रस में उपस्थित कार्बनिक अम्लों तथा अन्य अपद्रव्यों से मिल कर रासायनिक परिवर्तन करता है। प्रोटीन के अणु भी रस के गरम होने पर एक दूसरे से परस्पर मिलकर अवक्षिप्त हो जाते हैं। ये सब रस के ऊपर आकर लगभग आधा इंच से लेकर एक इंच तक मोटी परत (तेह) बनाते हैं। इनमें रस के अधिकांश अपद्रव्य रहते हैं। इन्हें लोहे के बड़े चम्मचों से अलग कर लेते है। चूने के अतिरिक्त विशेष प्रकार के बने कोयले, घास आदि का भी उपयोग अपद्रव्यों को दूर करने के लिए किया जाता है। अपद्रव्यों को अलग करने के पश्चात् रस को उबालते हैं। इससे रस का जल भाप बनकर उड़ता जाता है। जब रस का चौथाई भाग रह जाता है तब चाशनी (syrup) काफी गाढ़ी हो जाती है और इसमें मणिभ बनने के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। तब चाशनी को खुले बर्तनों में एक डेढ़ इंच मोटे स्तर में डाल देते हैं। जब यह थोड़ा गर्म ही रहता है तब, जब तक अर्ध ठोस न हो जाए, लकड़ी के बड़े चम्मचों से चलाते हैं। फिर या तो बड़े बड़े साँचों में डाल देते हैं या हाथ में लेकर छोटी-छोटी भेलियाँ (पिंडिया) बनाते हैं।

(3). ताड़ी से गुड़ बनाने की विधि लगभग ईख के रस से गुड़ बनाने की भाँति ही है। इसमें अपद्रव्य कम होते हैं। अत: उन्हें छाँटने के लिए चूना इत्यादि देने की आवश्यकता नहीं पड़ती। ईख के गुड़ की अपेक्षा इसमें ग्लूकोज़ की मात्रा अधिक होती हैं एवं चीनी की कम। विटामिन भी इसमें अधिक रहता हैं। अत: स्वास्थ्य की दृष्टि से यह ईख के गुड़ से अधिक लाभकारी है।

गुड़ के गुण पर मिट्टी, खाद आदि का प्रभाव-यदि मिट्टी में विलेय लवणों की मात्रा अधिक रहे तो उसमें पैदा होने वाली ईख का गुड़ प्राय: अच्छा नहीं होता। यह अधिक भूरा एवं जल सोखने वाला होता है तथा वर्षा ऋतु में पसीजता है और हलका काला भूरा सा होता है। उसकी मिठास में भी एक प्रकार का खारापन रहता है। जिस ईख की सिंचाई होती है उसका गुड़ इतना स्वादिष्ट एवं देखने में अच्छा नहीं होता जितना बरानी (बिना सिंचाई के) ईख का होता हैं। किंतु किसी किसी मिट्टी पर सिंचाई का प्रभाव गुड़ के गुणों पर अच्छा भी होता है।

गुड़ में चीनी का बाहुल्य होता है और इसकी मात्रा कभी कभी 90 प्रतिशत से भी अधिक तक पहुँच जाती है। इसमें जल का भी थोड़ा अंश रहता है जो ऋतु के अनुसार घटता बढ़ता रहता है। इसके अतिरिक्त इसमें ग्लूकोज़, फ्रुक्टोज़, खनिज (चूना, पोटाश, फासफ़ोरस आदि) भी अल्प मात्रा में रहते हैं।


गुड़ के घरेलु उपचार, रोग तथा उपचार विधि -

रक्त साफ करना - रकतविकार वाले व्यक्ति को चीनी के स्थान पर गुड़ की चाय, दूध, लस्सी किसी भी पेय में लाभदायक है।

उदर-वायु (Flatulence) - खाने के बाद 25 ग्राम गुड नित्य खाने से उदर-विकार ठीक होते हैं, शरीर में यौवन बना रहता है ।

पुत्रोत्पत्ति - (1) जिनके बार-बार कन्या पैदा होती है, यदि वे पुत्र उत्पन्न करना चाहते है तो एक मौर पंख का चन्द्रमा की शक्ल वालो भाग काट करे पीसकर जरा से गुड़ में गिलाकर एक गोली बना लें। इसी प्रकार तीन पंखों की तीन गोलिया बना लें। गर्भ के दूसरे माह के अन्त में, जब स्त्री का दाहिना स्वर चल रहा हो, अर्थात् दाहिनें नथुने से साँस आ रहा हो.नित्य प्रातः एक गोली तीन दिन तक जीवित बछड़े वाली गाय के दूध के साथ खिला दें । उस दिन केवल गोमाता के -दूध पर ही रहें। खाना न खायें। शाम को चावल खा सकते हैं। शर्तिया पत्र उन्पन्न होगा और चाँद जैसा गोरा। यह सहस्त्र बार परीक्षित है।

शिशु जन्म कैसे लेता है

-स्वामी जगदीश्वरानन्द : घरेलू ओषकिया पुस्तक 'स्वास्थ्य बोधामृत' संकलक धर्मदिवाकर श्री 105 क्षुल्लक सिद्धयागरजी महाराज, श्री जेन आचार्य धर्मसागरवर्ती आश्रम, सीकर (राज० में लिखा है " 

मोरपंख का चन्दोवा लेकर उसके चारों ओर के किनारे के सारे बाल काट दें, केवल चन्दोवा रखें, फिर उसे बारीक पीसकर पुराने गुड़ में मिलाकर गोली बना लें। इस प्रकार तीन चन्दवे की तीन गला बना लें। चाहें तो ऊपर चाँदी को वर्क लगा लें; फिर गर्भ के पौने दो महीने से सवा दो महीने के भीतर रविवार या मंगलवार को बछड़े (नर) वाली काली गाय के दुध के साथ एक गोली नित्य तीन दिन लें। उस दिन केवल दूध ही पीयें और कछ न खायें। इससे पुत्र उत्पन्न होगा'"।

(2) जिन स्त्रियों के कन्यायें ही होती हैं, लड़का नहीं होता, जब तक गर्भ धारण नहीं हो तब तक वे दाँहिनी करवट सो कर रतिक्रिया करें।

(3) जिस स्त्री के कन्या ही कन्या जन्म लेती हों उसे मासिक धर्म में पलास (ढाक) का एक पत्ता दूध में पीसकर पिलादें। ऐसा करने के बाद जो सन्तान होगी, वह पुत्र ही होगा।
-स्वामी जगदीश्वरानन्द।

आधे-सिर में दर्द जो सूर्य के साथ घटे-बढ़े तो 12 ग्राम गुड़ 6 ग्राम घी के साथ प्रातः सूर्योदय से पहले तथा रात को सोते समय खायें

उर-क्षत - शारीरिक परिश्रम करने वाले मजदूर गुड़ खाकर अपने शरीर की टूट-फूट को ठीक कर लेते हैं, थकावट मिटा लेते हैं। अधिक व्यायाम हॉकी आदि खेलने से छाती के अन्दर का माँस फट गया हो, जिसे उर-क्षत कहते हैं, यह दिन में तीन बार गुड़ खाने से ठीक हो जाता है।

हृदय की दुर्बलता, शारीरिक शिथिलता में गुड़ खाने से लाभ मिलता है। 

दमा, सूखी खाँसी - 15 ग्राम गुड़ और 15 ग्राम सरसों का तेल मिलाकर चाटने से लाभ होता है।

पेशाब साफ आना - गर्म दूध में गुड़ मिला कर पीने से पेशाब साफ और खुल कर आता है। रुकावट दूर होती है। यह नित्य दो बार पीयें।

हिचकी - पुराना सूखा गुड़ पीसकर इसमें पिसी हुईं सौंठ मिलाकर सूँघने से हिचकी चलना बन्द हो जाता है।

कृमि - कृमि नाशक ओषधि लेने से पहले रोगी को गुड़ खिलायें। इससे आँतों में चिपके कृमि निकल कर गुड़ खाने लगेगे फिर कृमि नाशक ओषधि के लेने से सरलता से बाहर आ जायेंगे।

काँच, काँटा, पत्थर शरीर में चुभ जाय, बाहर न निकले तो गुड़ और अजवाइन गर्म करके बाँधने से बाहर निकल जाता है l 

रोज गुड़ खाने के फायदे

गुड़ प्राकृतिक मिठाई के साथ ही सेहत का भी खजाना है, जानि‍ए गुड़ खाने के फायदे

पेट के रोग - गुड़ पेट की समस्याओं से निपटने के एक बेहद आसान और फायदेमंद उपाय है। यह पेट में गैस बनना और पाचन क्रिया से जुड़ी समस्त समस्याओं को हल करने में बहुत लाभदायक है। खाना खाने के बाद गुड़ का सेवन पाचन में सहयोग करता है।

पेट में गैस बनने की समस्या होने पर प्रतिदिन एक गिलास पानी या दूध के साथ गुड़ का सेवन करने से पेट में ठंडक होती है, और गैस भी नहीं बनती।

सर्दी होने पर - सर्दी के मौसम में या सर्दी होने पर गुड़ का प्रयोग आपके लिए अमृत के समान होगा। गुड़ की तासीर गर्म होने के कारण यह सर्दी, जुकाम और खास तौर से कफ से आपको राहत देने में मदद करता है इसके लिए दूध या चाय में गुड़ का प्रयोग किया जा सकता है, और आप इसका काढ़ा भी बनाकर पी सकते हैं। 

सर्दी होने पर हमें क्या करना चाहिए

(2). सर्द ऋतु में गुड़ और काले तिल के लड्डू खाने से जुकाम, खाँसी, दमा, ब्रांकाइटिस आदि रोग दूर होते हैं। ये रोग नहीं होने पर भी, तिल-गुड़ के लड्डू खाने से ये रोग नहीं होते। खाँसी, जुकाम होने पर 100 ग्राम गुड़ में एक चम्मच पिसी हुई सौंठ, एक चम्मच कालीमिर्च मिलाकर दिन में चार बार इसके चार हिस्से करके खायें, लाभ होगा।

गुड़ को अदरक के साथ गर्म कर, इसे गुनगुना खाने से गले की खराश और जलन में राहत मिलती है। इससे आवाज भी काफी बेहतर हो जाती है।

जोड़ों में दर्द की समस्या होने पर गुड़ का अदरक के साथ प्रयोग काफी लाभदायक सिद्ध होता है। प्रतिदिन गुड़ के एक टुकड़े के साथ अदरक खाने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।

त्वचा की सेहत के लिए भी गुड़ बहुत फायदेमंद होता है। गुड़ रक्त से हानिकारक टॉक्स‍िन्स को बाहर कर, त्वचा की सफाई में मदद करता है, और रक्त संचार भी बेहतर करता है।

प्रतिदिन थोड़ा सा गुड़ खाने से मुंहासों की समस्या नहीं होती और त्वचा में चमक आती है। यह आपकी त्वचा की समस्याओं को आंतरिक रूप से ठीक करने में मदद करता है।

शरीर में आयरन की कमी होने पर गुड़ आपकी काफी मदद कर सकता है। गुड़ आयरन का एक अच्छा स्रोत है। एनिमिया के रोगियों के लिए भी गुड़ बहुत फायदेमंद होता है।

आप दिन भर के काम काज की वजह से बहुत अधि‍क थकान या कमजोरी महसूस कर रहे हैं, तब भी गुड़ आपकी मदद कर सकता है। क्योंकि यह आपके शरीर में उर्जा के स्तर को बढ़ा देता है, और आपको थकान महसूस नहीं होती।

शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में गुड़ सहायक होता है। इसमें एंटी एलर्जिक तत्व होते हैं, इसलिए अस्थमा होने पर भी मरीज़ों के लिए इसका सेवन काफी फायदेमंद होता है।

अस्थमा के इलाज में गुड़ काफी लाभदायक होता है। गुड़ और काले तिल के लड्डू बनाकर खाने से सर्दी में अस्थमा की समस्या नहीं होती और शरीर में आवश्यक गर्मी बनी रहती है।

इसके अलावा सांस संबंधी रोगों के लिए पांच ग्राम गुड़ को समान मात्रा में सरसों के तेल में मिलाकर खाने से सांस संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिलता है।

प्रतिदिन दोपहर व रात के खाने के बाद थोड़ा सा गुड़ मुंह में रखकर चूसने से पाचन भी बेहतर होता है, और गैस भी नहीं बनती।

गुड़ शरीर में रक्त की सफाई कर मेटाबॉलिज्म रेट को भी नियंत्रित करता है। इसकें अलावा गुड़ गले और फेफड़ों के संक्रमण के इलाज में फायदेमंद होता है।

गला बैठ जाने और आवाज जकड़ जाने की स्थि‍ति में पके हुए चावल में गुड़ मिलाकर खाने से बैठा हुआ गला ठीक होता है एवं आवाज भी खुल जाती है।

कान में दर्द होने पर भी गुड़ काफी लाभदायक होता है। गुड़ को घी के साथ मिलाकर खाने से कान में होने वाले दर्द की समस्या ये निजात मिलती है।

पीलिया हो जाने पर पांच ग्राम सोंठ में दस ग्राम गुड़ मिलाकर एक साथ खाने से काफी लाभ मिलता है।

महिलाओं को मासिकधर्म की समस्याओं में राहत देने के लिए भी गुड़ काफी फायदेमंद है। उन दिनों में गुड़ का सेवन करने से हर तरह की तकलीफ में राहत मिलेगी।

स्मरण शक्ति बढ़ाने में भी गुड़ बहुत फायदेमंद है। इसके नियमित सेवन से याददाश्त बढ़ती है और दिमाग कमजोर नहीं होता।

अगर आपको कम भूख लगती है,तो आपकी इस समस्या का इलाज गुड़ के पास है। गुड़ खाने से आपकी भूख खुलेगी, और पाचनक्रिया दुरूस्त होगी।

गु़ड़ एक अच्छा मूड बूस्ट है, यह आपके मूड को खुशनुमा बनाने में मदद करता है। इसके अलावा माइग्रेन की समस्या में भी गुड़ फायदा पहुंचाता है। प्रतिदिन गुड़ का सेवन करने से लाभ होता है।

खट्टी डकारें आने या पेट की अन्य समस्या में गुड़ में काला नमक मिलाकर चाटने से लाभ होता है। इसके अलावा यह तंत्रिका तंत्र को मजबूत करने में काफी सहायक होता है।

वैसे तो गुड़ को गर्म तासिर का माना जाता है, लेकिन इसके पानी के साथ घोलकर पीने से यह शरीर में ठंडक प्रदान करता है, और गर्मी को नियंत्रित करता है।

अस्थमा के इलाज में गुड़ काफी लाभदायक होता है। गुड़ और काले तिल के लड्डू बनाकर खाने से सर्दी में अस्थमा की समस्या नहीं होती और शरीर में आवश्यक गर्मी बनी रहती है।

इसके अलावा सांस संबंधी रोगों के लिए पांच ग्राम गुड़ को समान मात्रा में सरसों के तेल में मिलाकर खाने से सांस संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिलता है।

गला बैठ जाने और आवाज जकड़ जाने की स्थि‍ति में पके हुए चावल में गुड़ मिलाकर खाने से बैठा हुआ गला ठीक होता है एवं आवाज भी खुल जाती है।

कान में दर्द होने पर भी गुड़ काफी लाभदायक होता है। गुड़ को घी के साथ मिलाकर खाने से कान में होने वाले दर्द की समस्या से छुटकारा मिलता है।

पीलिया हो जाने पर पांच ग्राम सोंठ में दस ग्राम गुड़ मिलाकर एक साथ खाने से काफी लाभ मिलता है। इसके अलावा जुकाम ज्यादा हो जाने पर गुड़ को पिघ्‍ालाकर उसकी पपड़ी बनाकर खाने से लाभ होता है।

महिलाओं को मासिकधर्म की समस्याओं में राहत देने के लिए भी गुड़ काफी फायदेमंद है। उन दिनों में गुड़ का सेवन करने से हर तरह की तकलीफ में राहत मिलेगी।

स्मरण शक्ति बढ़ाने में भी गुड़ बहुत फायदेमंद है। इसके नियमित सेवन से याददाश्त बढ़ती है और दिमाग तेज होता है।

आपको कम भूख लगती है,तो आपकी इस समस्या का इलाज गुड़ के पास है। गुड़ खाने से आपकी भूख खुलेगी, और पाचनक्रिया दुरूस्त होगी।

गु़ड़ एक अच्छा मूड बूस्ट है, यह आपके मूड को खुशनुमा बनाने में मदद करता है। इसके अलाव माइग्रेन की समस्या में भी गुड़ फायदा पहुंचाता है। प्रतिदिन गुड़ का सेवन करने से लाभ होता है।

खट्टी डकारें आने या पेट की अन्य समस्या में गुड़ में काला नमक मिलाकर चाटने से लाभ होता है। इसके अलावा यह तंत्रिका तंत्र को मजबूत करने में काफी सहायक होता है।

वजन कम करने के लिए भी गुड़ का प्रयोग किया जा सकता है। शरीर में जल के अवधारण को कम करके शरीर के वजन को नियंत्रित करता है।

गुड़ को गर्म तासीर का माना जाता है, लेकिन इसके पानी के साथ घोलकर पीने से यह शरीर में ठंडक प्रदान करता है, और गर्मी को नियंत्रित करता है।

गन्ना एक फसल है जिसे किसान द्वारा खेती की जाती है l गन्ना का इंग्लिश नाम (sugarcane) है तथा वैज्ञानिक नाम - सैकेरम औफिसिनेरम (Saccharum officinarum) है l इसे ईख, साँठा भी कहते हैं। गन्ना, ज्वार, मक्का की तरह होती है l  गन्ना की खेती भारत में होती है l गन्ना को छील कर चूसा जाता है l बहुत मीठा रस निकलता है l गन्ना से रस निकाल कर शक्कर, गुड़ बनाये जाते है l 

खाली पेट गन्ना का जूस पीने के फायदे
खाली पेट गन्ना का जूस पीने के फायदे

गन्ने का रस पीने से क्या फायदे - What are the benefits of drinking sugarcane juice

रोजाना गन्ने का रस पीने और चूसते रहने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है। गन्ने का रस बहुत ही फायदेमंद और गुणकारी रस है l गन्ना भोजन पचाता है, कब्ज दूर करता है, शक्तिदाता है। शरीर मोटा करता है। पेट की गर्मी, हदय की जलन को दूर करता है।

गन्ना में पाये जाते है विटामिन और पोषक तत्व - Vitamins and nutrients are found in sugarcane

इसमें कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन, मैग्नेशियम और फॉस्फोरस जैसे आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं l  गन्ने का  रस पीने से खांसी दूर होती, कृमि नष्ट हो जाती है, गर्मी काम होती है, रक्तशुद्धि होती है l पीलिया में गन्ना बहुत फायदा करता है l इनसे हड्डि‍यां मजबूत बनती हैं और दांतों की समस्या भी कम होती है. गन्ने के रस के ये पोषक तत्व शरीर में खून के बहाव को भी सही रखते हैं l


गन्ना के रस घरेलु उपचार के रूप में भी काम लिया जाता है तथा औषधि गुण पाये जाते है l आइये जाने गन्ने से कौन कौन सी बीमारियों में गन्ने से उपचर कियक जा सकता है l


गन्ना खाने के फायदे, घरेलु उपचार

गन्ना के रस सेवन और घरेलु उपचार  - Sugarcane juice consumption and home remedies

कुकर खाँसी - कच्ची मूली का रम एक छटाक (60ग्राम) एक गिलास गन्ने के रस में मिलाकर दिन में दो बार पिलाने से लाभ होता है ।

सुखी खाँसी - एक गिलास गरन्ने का रस नित्य दो बार पीने से सूखी खाँसी में लाभ होता है। छाती की घबराहट जाती रहती है।

रक्तातिसार  - एक. कप गन्ने के रस में आधा कप अनार का रस मिलाकर सबह-शाम पिलाने से रक्तातिमार मिटता है।

पथरी रोग - पथरी ईख चूसते रहने मे पथरी टुकड़े-टुकड़े होकर निकल जाती है। गन्ने का रस भी लाभदायक है।

धीमाबुखार - बुखार में गन्ने का रस एक गिलास रोज दो बार सुबह-शाम पीना लाभदायक है।

रक्त विकार - खाने के बाद एक गिलास गन्ने का रस पीने से रक्त साफ होता है। गन्ना नेत्रों के लिए लाभकारी है ।

पित्त की उलटी - पित्त की उलटी होने पर एक गिलाम गन्ने के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर पिलाने से लाभ होता है। हिचकी गन्ने का रस पीने से बन्द हो जाती है ।

पीलिया - जौ का सत्तु खाकर ऊपर से गन्ने का रस पीयें। एक सप्ताह में पीलिया ठीक हो जायेगा। सुबह सुबह गन्ना चूसें।
मेहंदी जिसे हिना भी कहते हैं, मेंहदी को इंग्लिश में (Heena Plant) तथा वैज्ञानिक नाम- लॉसोनिया आल्बा (Lawsonia alba) के नाम से जाना जाता है l मेहंदी का प्रयोग किया शरीर को सजाने का एक साधन होता है। इसे हाथों, पैरों, बाजुओं आदि पर लगाया जाता है। इसके अलावा त्वचा, बाल, नाखून, चमड़ा और ऊन रंगने के काम में प्रयोग किया जाता है। इससे ही मेहंदी भी लगायी जाती है l

मेहंदी हिना नामक पौधे/झाड़ी की पत्तियों को सुखाकर पीसा जाता है। फिर उसका पेस्ट लगाया जाता है। कुछ घंटे लगने पर ये रच कर लाल-मैरून रंग देता है, जो लगभग सप्ताह भर चलता है।

हाथों में मेहंदी लगाने के फायदे
हाथों में मेहंदी लगाने के फायदे

भारतीय नारी का श्रंगार है मेहंदी

मेहंदी का प्रयोग प्राचीनकाल से होता आ रहा है। सभी किशोरियाँ और स्त्रियाँ मेहंदी को बड़े शौक से लगाती है, रचाती है, यहाँ तक की लड़कियां और स्त्रियाँ ही नहीं बल्कि कई पुरुष भी मेहंदी के बड़े शौकीन होते है l हमारी भारतीय संस्कृति में मेहंदी का प्रचलन प्राचीनकाल से होता आ रहा है, क्योंकि मेहंदी नारी श्रृंगार का एक अभिन्न अंग है जिसके बिना हर रीति-रिवाज अधुरा माना जाता है l विवाह के समय मेहंदी की रसम भी की जाती है l



मेहंदी के घरेलु औषधि उपचार 

मेहंदी का उपयोग श्रंगार के लिए किया जाता है हाथ पैरो की सुंदरता के लिए शादी विवाह जैसे शुभ अवसरों पर मेहंदी का प्रयोग किया जाता है लड़किया और औरते तो मेहंदी की दीवानी होती है l मेहंदी का प्रयोग हाथ पैरो के लिए ही नहीं बल्कि अनेक प्रकार के रोगों में भी औषधि के रूप में, उपचार करने के लिए मेहंदी का प्रयोग किया जाता है l

मेहंदी के घरेलु औषधि उपचार

मुँह में छाले - 50 ग्राम मेंहदी को दो गिलास पानी में भिगो कर उस पानी से कुल्ले करने से मुँह के छाले मिटते हैं अथवा इसके पतों को मुँह में रखकर चबाने से भी मुँह के छाले ठीक हो जाते हैं।

फोड़े-फून्सी - मेंहदी को उबालकर उसके पानी सेफोड़े फुंसी धोने से फोड़े फुंसी जल्दी ठीक हो जाते है l  

मसूड़े के रोग - मसूड़े के ऐसे असाध्य रोग जो दूसरी औषधियों से न ठीक होते हों मेहंदी के पत्तों के उबले हुए पानी से कुल्ला करने से ठीक हो जाते हैं।

पैरों की जलन - गर्मी के दिनों में जिन लोगों के पैरों में निरन्तर जलन होती है उनके पैर में मेहंदी लगाने से लाभ होता है।

पैरों की अँगलियाँ गलना - पाँव की अँगलियाँ गलती हों, कटती हों तो सरसों का तेल लगाकर मेंहदी छिड़कें पानी में काम करने से यदि अँगलियाँ गल गई हों तो मेहंदी का एक भाग और इसकी आधी हल्दी दोनों को मिलाकर नित्य दो बार लगाने से लाभ होता है । हाथ पाँव फटने लगें तो मेंहदी लगाइये, मेहंदी को लगाने से जो फायदा होगा आप स्वयं देखेंगे। यहाँ तक कि घाव पर भी मेहंदी का लेप करे, लाभ होगा l शरीर का कोई भाग यदि गलने लगे तो मेहंदी का उपयोग हितकारी है। यह परिक्षण किया हुआ परीक्षित उपचार है।

बाल काले करना - 50 ग्राम मेहंदी, आधा चम्मच कॉफी, 25 ग्राम आँवला, दध में भिगोकर बालों में लगायें। एक घण्टे बाद पानी से सिर धोयें। यह सप्ताह में दो बार करें । सफ़ेद खिचड़ी बाल काले सुनहरे हो जायेंगे। मेंहदी आँवला पिसा हुआ भी बाजार में मिलता है । ये भी काम में ले सकते हैं।

बालों में मेहंदी लगाने के फायदे

पथरी रोग - 6 ग्राम मेंहदी के पत्ते 500 ग्राम पानी में उबालें, जब 50 ग्राम पानी रह जाये तो छानकर गर्म-गर्म यह पानी पिलायें। यह पाँच दिन करें । पथरी निकल जायेगी । गुर्दे के रोग ठीक हो जायेंगे।

अलाइयाँ (Prickly Heat) - गर्मी में पीठ और गले पर व शरीर की नरम त्वचा पर छोटी-छोटी मरोड़ी (घमौरियाँ) होने लगती हैं। जिन्हे अलाइयाँ भी कहते है l मेंहदी के लेप से एकदम उनकी जलन मिटकर लाभ हो जाता है। यह आजमाया हुआ परीक्षित उपचार है।

ठण्डापन - मेहंदी के इस्तेमाल से दिमाग ठण्डा और शान्त रहता है। उच्च रक्तचाप वाले रोगियों को पैरों के तलवों और हथेली पर मैंहदी का लेप समय-समय पर करने से आराम मिलता है। मेंहदी रचाने से शरीर की बढ़ी गर्मी बाहर निकलती है। तन-मन में ठण्डक महसुस होती है। गर्मी बाहर को निकलती रहती है। मेंहदी के फूल शरीर की बढ़ी गर्मी समाप्त करते हैं।

रात को मेंहदी स्वच्छ पानी में भिगो दें, सवेरे निथार कर पानी पीयें। शरीर में शीतलता के साथ रक्त की सफाई भी होगी और एलर्जी वाले रोगियों के लिए यह बड़ी गुणकारी चिकित्सा है। ऐसे पानी का सेवन शरीर से विजातीय द्रव्य बाहर निकालता है। रक्त में शीतलता बनाये रखने के लिए और त्वचा-रोगों से सुरक्षा हेत मेंहदी का पानी पीयें और मेंहदी को गर्मी के मौसम में हर प्रकार से उपयोग करें।



मिरगी रोग में दो कप दूध में चौथाई कप मेंहदी के पत्तों का रस मिलाकर देने से रोगी को आशा से,अधिक लाभ होता है। यह नित्य प्रातः खाना खाने के दो घंटे बाद कछ सप्ताह तक दें।

थकान - रेस करने वाले युवक, क्रिकेट खेलने वाले जवान यदि मेंहदी अपने पैरों के तलवों पर लगायें तो थकान भी कम होती है और शीतलता रहती है।